Edited By meena, Updated: 26 Apr, 2026 06:34 PM

प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां (Political appointments) शुरू हो चुकी है और कई नेताओं को पद भी मिल गए हैं। एक ओर जहां पार्टी लगातार इन नियुक्तियों को लेकर पार्टी...
टीकमगढ़ : प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां (Political appointments) शुरू हो चुकी है और कई नेताओं को पद भी मिल गए हैं। एक ओर जहां पार्टी लगातार इन नियुक्तियों को लेकर पार्टी और संगठन की मजबूती का दावा कर रही है वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर ही कई नेताओं को पद देने के विरोध में कार्यकर्ताओ ने मोर्चा खोल दिया है।
ताजा मामले में पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महेश केवट (Mahesh Kewat) को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने पर बवाल हो गया है। उनकी इस नियुक्ति के बाद जहां पार्टी के ही कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है, तो पद पर बैठे जिम्मेदार भी पार्टी के इस आदेश को एक अनुशासित कार्यकर्ता की तरह मुद्दे पर चुप हैं जिससे बवाल तो हवा मिलती दिख रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि ओरछा नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उन्हें पार्टी से 6 साल के निष्कासित किया गया था। लेकिन अब अहम ओहदा देकर सम्मानित किया गया है।
बता दें कि 24 अप्रैल की देर शाम मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के अपर सचिव सुनील मड़ावी ने ओरछा के महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने का आदेश जारी किया है। आदेश जारी हुआ तो ओरछा के साथ ही निवाड़ी के भी भाजपा कार्यकर्ताओं में विरोध के स्वर उठ गए। चर्चा ये है कि जब इनक 6 साल के लिए निष्कासित किया गया था तो यह पद कैसे मिल गया। हालांकि इस मामले पर पार्टी पदाधिकारी खुल कर तो कुछ नहीं कर रहे है।
महेश केवट ने खुद को बताया समर्पित कार्यकर्ता
वहीं दूसरी ओर मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट से 27 जून 2022 को प्रदेश महामंत्री द्वारा जारी किए गए निष्कासन पत्र को ही फर्जी बता दिया और कहा कि ये सारा काम कांग्रेस भ्रम फैलाने का काम कर रही है। वो 30 सालों से पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हैं।