Edited By meena, Updated: 21 Apr, 2026 06:20 PM

संगठन में समन्वय अभाव के चलते ऐसी स्थिति निर्मित हो गई कि 13 में से 10 मंडलों में दो-दो अध्यक्ष घोषित हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने भाजपा की कार्यप्रणाली पर तो सवाल उठाए ही हैं ये विषय चर्चा में भी आ गया है...
(भिलाई): छतीसगढ़ के भिलाई से एक राजनीतिक विवाद की खबर सामने आई है। खबर BJYM भारतीय जनता युवा मोर्चा को लेकर हैं। दरअसल भिलाई में भाजयुमो मंडल अध्यक्ष नियुक्ति पर बवाल हो गया है। एक ही मंडल में दो-दो अध्यक्ष घोषित होने हंगामा हो रहा है। मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर भिलाई जिले में इस विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल जानकारी ये आ रही है है कि संगठन में समन्वय अभाव के चलते ऐसी स्थिति निर्मित हो गई कि 13 में से 10 मंडलों में दो-दो अध्यक्ष घोषित हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने भाजपा की कार्यप्रणाली पर तो सवाल उठाए ही हैं ये विषय चर्चा में भी आ गया है।
युवा मोर्चा की सूची से शुरू विवाद
जानकारी के मुताबिक, 19 अप्रैल की रात युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल ने 13 मंडलों के अध्यक्ष और महामंत्री की आधिकारिक सूची जारी की थी। हालांकि शुरू में इसे संगठन का फैसला माना गया,लेकिन फिर विवाद खड़ा हो गया और नियुक्तियों पर हंगामा मच गया ।
10 मंडल अध्यक्षों ने जारी की अलग सूची
वहीं फिर 20 अप्रैल को 13 में से 10 मंडल अध्यक्षों ने इस सूची को मानने से इनकार कर दिया और अपनी‑अपनी अलग सूची जारी कर दी। इसके बाद तो संगठन में हड़कंप ही मच गया। दो सूचियां सामने आने के बाद काफी बवाल मचा।
पहले 13 मंडलों अध्यक्षों की एक सूची जारी की गई। इस सूची में पश्चिम मंडल के लिए आयुष उपाध्याय, पूरब मंडल में भास्कर राव, खुर्सीपार मंडल में मनीष चौधरी, वैशाली नगर में रतन शर्मा, सुपेला में अनुराग मारकंडे, काेहका मंडल में मनदीप सिंह, कैंप मंडल में चंदन यादव, जामुल में मनीष साहू, भिलाई- 3 संदीप पाली और चरोदा मंडल में राजेश यादव को अध्यक्ष बनाया गया।
इस घोषणा से भाजपा के मंडल अध्यक्ष हुए नाराज
वहीं इस घोषणा के तुरंत बाद नाराज भाजपा के मंडल अध्यक्षों ने अपने-अपने समर्थकों के नामों की घोषणा कर दी। इनमें 13 में से 10 मंडलों में समानांतर नियुक्तियां थीं, जिससे संगठन में असमंजस की स्थिति बन गई है। वहीं मंडल अध्यक्षों का कहना है कि पार्टी की नीति के अनुसार उनकी सहमति से नाम तय होते हैं, लेकिन इस बार बिना सलाह के सीधे नाम घोषित कर दिए गए, जो नियमों के विपरीत है। इससे मंडल स्तर ही नहीं, भाजयुमो के जिला पदाधिकारियों की घोषणा को लेकर भी असंतोष है। लिहाजा ये मामला प्रदेश की राजनीति में काफी गरमा गया है।