Edited By meena, Updated: 07 Apr, 2026 06:57 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों संगठन और नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं...
भोपाल : मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों संगठन और नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। दोनों नेता प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने और समर्थकों को अहम पद दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत बताए जा रहे हैं।
प्रदेश में निगम-मंडलों, बोर्ड और आयोगों में नियुक्ति की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इन पदों के लिए करीब 50 नाम सामने आए हैं, जिनमें से छंटनी कर 20 से 22 अध्यक्षों की सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को केंद्रीय नेतृत्व के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा, जहां से सहमति मिलने के बाद पहली सूची जारी हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, संगठन और विभिन्न बोर्ड-निगमों में नियुक्तियों को लेकर दिल्ली में मंथन तेज है। सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान लगातार पार्टी हाईकमान के संपर्क में हैं और अपने-अपने खेमों के नेताओं के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में प्रदेश में बड़े स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां हो सकती हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा संगठन में संतुलन बनाए रखना पार्टी के लिए अहम है। ऐसे में अलग-अलग गुटों के नेताओं को साधने और उन्हें जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। सिंधिया और शिवराज, दोनों ही बड़े जनाधार वाले नेता हैं, इसलिए उनकी भूमिका इस प्रक्रिया में निर्णायक मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री निवास पर हाल ही में हुई एक हाई लेवल बैठक ने कई राजनीतिक संदेश दे दिए हैं। इस बैठक में Mohan Yadav और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal के साथ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सक्रिय मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि वह अभी भी फैसलों के केंद्र में हैं। खास बात ये है कि निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने खुद कई नाम सुझाए हैं। माना जा रहा है कि उनके अनुभव और संगठन पर पकड़ की वजह से इन नामों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ, Jyotiraditya Scindia की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों की मानें तो सिंधिया अपने चहेतों को निगम मंडल में नियुक्ति दिलवाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। इनमें पूर्व मंत्री इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपीएस भदौरिया, गिरिराज दंडोतिया और पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल का नाम शामिल है। सिंधिया दिल्ली से भोपाल तक इसकी लॉबिंग में जुटे है। सूत्रों की मानें तो सिंधिया अपने हारे हुए समर्थकों को मंत्री पद का दर्जा दिलाने की ज़िद पर अड़े है। बताया जा रहा है कि कई ऐसे नेता, जो लंबे समय से पद की प्रतीक्षा में हैं, उन्हें इस बार मौका मिल सकता है। खासतौर पर उन कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है जिन्होंने चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में नियुक्तियों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी हाईकमान किसे जिम्मेदारी सौंपता है। आने वाले दिनों में होने वाले फैसले प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।