Edited By Himansh sharma, Updated: 17 Jan, 2026 11:37 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। दलित, ओबीसी और आदिवासी महिलाओं को लेकर दिए गए हालिया बयान ने न सिर्फ़ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि समाज के हर वर्ग में आक्रोश पैदा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि तीखी आलोचना के बावजूद बरैया ने माफ़ी मांगने के बजाय अपने बयान को धर्मग्रंथों से जोड़कर सही ठहराने की कोशिश की।
बयान जिसने हदें पार कर दीं
फूलसिंह बरैया ने कथित तौर पर कहा कि अगर कोई तीर्थ नहीं जा सकता तो दलित, ओबीसी और आदिवासी महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने पर तीर्थ जैसा फल मिलता है। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक भूचाल आ गया। विपक्ष ही नहीं, उनकी ही पार्टी के भीतर भी नाराज़गी देखी गई, लेकिन बरैया अपने बयान पर अडिग रहे।
विवादों से पुराना नाता
यह पहला मौका नहीं है जब बरैया की ज़ुबान विवाद का कारण बनी हो। उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को ‘आत्महत्या’ बताकर इतिहास और भावनाओं दोनों को आहत किया।हाल ही में कांग्रेस की एक बैठक में उन्होंने SC/ST वर्ग के विधायक और सांसदों की तुलना ‘कुत्ते’ से कर दी, वह भी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में। 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत को लेकर दी गई चुनौती के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने चेहरे पर कालिख पोतकर प्रदर्शन किया, जो देशभर में चर्चा का विषय बना।
राजनीतिक सफर और पहचान
1962 में भिंड जिले में जन्मे फूलसिंह बरैया पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। उन्होंने राजनीति की शुरुआत कांशीराम के साथ बसपा से की और लंबे समय तक उनके करीबी रहे। बाद में मायावती से मतभेद के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ी और कई दलों से होते हुए कांग्रेस में पहुंचे। वे पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं और खुद को कट्टर अंबेडकरवादी बताते हैं। अब तक वे 8 लोकसभा और 6 विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत सिर्फ़ दो बार ही मिली।
छवि बनाम दावे
संविधान की प्रतियां बांटने जैसे प्रतीकात्मक कदमों से खुद को दलितों और पिछड़ों का हितैषी बताने वाले बरैया की छवि उनके बयानों के कारण बार-बार सवालों के घेरे में आ जाती है। आलोचकों का कहना है कि सामाजिक न्याय की बात करने वाले नेता से इस तरह की भाषा और सोच की उम्मीद नहीं की जा सकती।
राजनीति में असर
बरैया के ताज़ा बयान ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी नेतृत्व पर दबाव है कि वह स्पष्ट रुख अपनाए, क्योंकि ऐसे बयान न सिर्फ़ महिलाओं की गरिमा पर चोट करते हैं, बल्कि दलित और आदिवासी समाज को भी आहत करते हैं।
फूलसिंह बरैया का नाम आज मध्य प्रदेश की राजनीति में विकास या जनसेवा से ज़्यादा विवादित बयानों और बेलगाम ज़ुबान के लिए जाना जाने लगा है। सवाल यह है कि क्या राजनीति में लगातार विवाद खड़ा करना ही पहचान बन चुका है, या पार्टी और समाज अब इस पर सख़्त रुख अपनाएंगे?