टिकट आशुतोष को मिला, लेकिन अग्नि परीक्षा नरोत्तम की! जानिए क्या कहते हैं दतिया के समीकरण

Edited By meena, Updated: 15 Jul, 2026 09:04 PM

ashutosh got the ticket but it is a trial by fire for narottam

दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट को लेकर उठे सियासी तूफान के बाद भले ही भाजपा और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच उठा सियासी तूफान थम गया हो लेकिन नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य...

दतिया : दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट को लेकर उठे सियासी तूफान के बाद भले ही भाजपा और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच उठा सियासी तूफान थम गया हो लेकिन नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य पर मंडरा रहा खतरा कम नहीं हुआ है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि टिकट भले ही आशुतोष तिवारी को मिला हो लेकिन इस उपचुनाव में अग्निपरीक्षा नरोत्तम मिश्रा की ही होने वाली है। क्योंकि टिकट कटने के बाद दतिया में विद्रोह हुआ उसकी वजह से कहीं न कहीं भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का जिम्मा और स्टार प्रचारक दोनों का ही जिम्मा नरोत्तम मिश्रा को मिला है।  

भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को दतिया उपचुनाव का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जताई थी। विरोध की खबरें दिल्ली तक पहुंचीं, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने पहले उन्हें भोपाल बुलाया, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इसके बाद रविवार को दिल्ली में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ करीब एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई। बैठक के बाद डॉ. मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पार्टी के फैसले के खिलाफ कभी कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का हर निर्णय उन्हें स्वीकार है और टिकट नहीं मिलने के लिए वे किसी व्यक्ति या नेतृत्व को जिम्मेदार नहीं मानते।

भले ही देखने में सबकुछ ठीक लग रहा हो लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा। भाजपा के लिए यह संगठनात्मक एकजुटता और टिकट वितरण के फैसले की परीक्षा होगी। वहीं  डॉ. नरोतम मिश्रा के लिए यह साबित करने का अवसर होगा कि टिकट भले न मिला हो, लेकिन दतिया में उनकी पकड़ और प्रभाव आज भी कायम है। इतना ही नहीं ये भी साबित करना होगा कि उन्होंने कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करके सबको एकजुट किया है। दूसरी ओर कांग्रेस भाजपा की इस सियासी घटनाक्रम का पूरा पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेगी। ऐसे में दतिया की लड़ाई आने वाले दिनों में प्रदेश की सबसे रोचक राजनीतिक जंग होने वाली है।

भले ही संगठन ने डॉ. मिश्रा पर भरोसा जताते हुए नरोत्तम मिश्रा को नामांकन प्रक्रिया से लेकर स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया और कांग्रेस को संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में सबकुछ ठीक है। लेकिन दतिया में सीएम मोहन की मौजदूगी में भरे मंच पर नरोत्तम मिश्रा की आखों में आसूं आना कहीं न कहीं नाराजगी या अंदरूनी घुटन को दर्शा रहे थे। फिलहाल आने वाले दिनों में अनुभव, संगठन पर पकड़ और जनाधार के जरिए डॉ नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव में किस कदर भूमिका निभाते हैं ये देखने वाली बात होगी। दतिया उपचुनाव के नतीजे ही उनका राजनीतिक भविष्य तय करेंगे कि वे अपनी साख बचा पाते हैं या नहीं। हो सकता है कि जीत से खुश होकर संगठन में उन्हें अहम औदे से नवाजा जाए।

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