Edited By meena, Updated: 04 Mar, 2026 05:09 PM

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक हाईप्रोफाइल पारिवारिक विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक बैंक मैनेजर महिला ने अपने नेता पति पर दहेज उत्पीड़न...
भोपाल : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक हाईप्रोफाइल पारिवारिक विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक बैंक मैनेजर महिला ने अपने नेता पति पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और घर से निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब पुलिस एफआईआर तक पहुंच चुका है और जांच जारी है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह विवाद निजी रिश्तों से निकलकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
प्रेम विवाह, दूसरी शादी और छिपे हुए राज
आरोप लगाने वाली महिला शिखा सिंह हैं, जिन्होंने पहले एक आईएएस अधिकारी से विवाह किया था। वर्ष 2003 में हुई यह शादी कथित रूप से सुखद जीवन के साथ शुरू हुई थी। वे भोपाल के पॉश इलाके चार इमली में रह रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह चौहान से हुई, जो उस समय राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR) से जुड़े पद पर थे।
शिखा का आरोप है कि चौहान ने उन्हें अपने प्रेम जाल में फंसाया और पहली शादी तोड़ने के लिए प्रेरित किया। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। यह दोनों की दूसरी शादी थी और इस रिश्ते को 19 वर्ष हो चुके हैं। शिखा का कहना है कि शादी के बाद कुछ वर्षों तक सब सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां बदलने लगीं।
दहेज की मांग और प्रताड़ना के आरोप
शिखा सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके पति ने मायके से दो करोड़ रुपये लाने का दबाव बनाया। जब उन्होंने इनकार किया, तो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका दावा है कि मारपीट के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है, जिसमें दहेज उत्पीड़न, स्लो पॉइजन देकर जान से मारने की कोशिश और घरेलू हिंसा जैसे आरोप शामिल हैं।
महिला का यह भी कहना है कि शादी के बाद धीरे-धीरे उन्हें सामाजिक और पारिवारिक रूप से अलग-थलग किया गया। उनका आरोप है कि आर्थिक दबाव बनाकर उन्हें कमजोर करने की कोशिश की गई, जिससे वे विरोध न कर सकें।
फर्जी दस्तखत और एनजीओ से हटाने का मामला
शिखा ने अपने पति पर धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया है। उनके अनुसार, उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें जन शिक्षण संस्थान और दो एनजीओ के डायेक्टर पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कथित रूप से चौहान के करीबी लोगों को नियुक्त किया गया। इस संबंध में उन्होंने भारत सरकार के कौशल विकास मंत्रालय में भी शिकायत दर्ज कराई है। यह आरोप मामले को केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रखता, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी आयाम भी जोड़ता है।
पति का पक्ष: ब्लैकमेल के आरोप
दूसरी ओर, महेंद्र सिंह चौहान ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि रिश्ते में पहले ही दरार आ चुकी थी और वे तलाक लेना चाहते थे। चौहान का दावा है कि उन्होंने तलाक का नोटिस भेजा था, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई। उनका आरोप है कि पत्नी पिछले कई वर्षों से उन्हें ब्लैकमेल कर रही थीं।
पुलिस जांच पर टिकी नजरें
अब यह मामला कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान और सबूतों की जांच कर रही है। फिलहाल किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह मामला निजी रिश्तों, राजनीतिक प्रभाव और कानूनी प्रक्रिया के जटिल संगम का उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालत की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगा कि सच्चाई किस पक्ष में है। तब तक यह हाईप्रोफाइल विवाद भोपाल की चर्चाओं में बना रहेगा।