Edited By meena, Updated: 19 Feb, 2026 02:38 PM

मध्यप्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नियाज खान अपने बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके नियाज खान सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर...
भोपाल : मध्यप्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नियाज खान अपने बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके नियाज खान सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर राय रखते रहे हैं। इस बार उन्होंने बांग्लादेश और भारत में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर केंद्र सरकार से एक विनम्र अपील की है, जिससे सियासी हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?
पूर्व आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बांग्लादेश में दो हिंदू मंत्रियों को शामिल किए जाने की खबर से उन्हें खुशी हुई। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि बांग्लादेश में लगभग एक करोड़ हिंदू हैं और वहां दो मंत्री बनाए गए हैं, जबकि भारत में लगभग 20 करोड़ मुस्लिम आबादी होने के बावजूद केंद्र सरकार में एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है — यह उन्हें आश्चर्यजनक लगा। उन्होंने आगे भाजपा और RSS से विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि 2-3 मुस्लिम मंत्रियों को बनाने पर गंभीर चिंतन किया जाना चाहिए। उनका यह बयान आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
नियाज खान के बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि भारत में धर्म आधारित राजनीति नहीं होती। उनके अनुसार, किसी भी पद पर नियुक्ति योग्यता, समय और आवश्यकता के आधार पर होती है, न कि धर्म या जाति के आधार पर। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए सरकार में पहले भी मुस्लिम मंत्री रह चुके हैं।
वहीं भाजपा के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने भी स्पष्ट किया कि मंत्री पद धर्म के आधार पर नहीं दिए जाते। उन्होंने कहा कि पूर्व में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मंत्री रहे हैं और नियुक्तियां परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार होती हैं। किसी अन्य देश की तुलना भारत से करना उचित नहीं है।
प्रतिनिधित्व पर राजनीतिक विमर्श
यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और समावेशन को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। एक ओर नियाज खान जैसे लोग आबादी के अनुपात के आधार पर प्रतिनिधित्व की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा नेतृत्व योग्यता-आधारित चयन की नीति को दोहरा रहा है। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को तेज कर दिया है और आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक विमर्श का विषय बन सकता है।