नायब तहसीलदार से IAS तक! 33 साल की मेहनत रंग लाई, राज्य के इस अधिकारी ने रचा इतिहास

Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Feb, 2026 10:38 AM

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छत्तीसगढ़ प्रशासनिक इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रशासनिक इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। राज्य प्रशासनिक सेवा के सात अधिकारियों को भारत सरकार द्वारा आईएएस कैडर अवॉर्ड किया गया है। इस डीपीसी में शामिल नामों में वीरेंद्र बहादुर पंचभाई का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वे छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद नायब तहसीलदार कैडर से प्रमोशन पाकर आईएएस बनने वाले पहले अधिकारी बन गए हैं।

संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की कहानी

वीरेंद्र बहादुर पंचभाई मूल रूप से दुर्ग जिले के रहने वाले हैं। उनका सफर संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की मिसाल है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय 1993 में एमपीपीएससी के जरिए नायब तहसीलदार के पद पर चयन हुआ। इसके बाद वर्षों की प्रशासनिक सेवा और विभागीय पदोन्नति के बाद वे 2010 में राज्य प्रशासनिक सेवा में प्रमोट हुए।

जहां भी जिम्मेदारी मिली, छोड़ी अपनी अलग छाप

पंचभाई ने कई वर्षों तक अभनपुर में नायब तहसीलदार और तहसीलदार के रूप में सेवाएं दीं। प्रशासनिक कार्यों में उनकी सख्ती के साथ संवेदनशीलता की पहचान बनी। वर्तमान में वे नारायणपुर जिले में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।

नक्सल प्रभावित इलाकों में भी निभाई बड़ी भूमिका

नारायणपुर जैसे नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र में पदस्थ रहते हुए पंचभाई ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती दी। अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील इलाकों में पहुंचकर सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग, जनसुनवाई और विकास कार्यों को गति दी। स्थानीय लोगों से सीधा संवाद कर प्रशासन पर भरोसा बढ़ाया।

पहली नौकरी से IAS कैडर तक का सफर

वीरेंद्र बहादुर पंचभाई की पहली सरकारी नौकरी सहायक प्राध्यापक के रूप में लगी थी। इसके बाद 1993 में नायब तहसीलदार बने। वर्षों की ईमानदार सेवा और अनुशासित कार्यशैली के चलते वे अपर कलेक्टर पद तक पहुंचे और अब डीपीसी के जरिए उन्हें आईएएस कैडर अवॉर्ड किया गया है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

अब तक अधिकतर अधिकारी नायब तहसीलदार से प्रमोशन पाकर अधिकतम अपर कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर तक पहुंचकर सेवानिवृत्त हो जाते थे। लेकिन पंचभाई ने यह मिथक तोड़ दिया कि छोटी पोस्ट से शुरुआत करने वाला अफसर भी आईएएस तक पहुंच सकता है।

वीरेंद्र बहादुर पंचभाई की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं।

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