थप्पड़ कांड वाली नायब तहसीलदार की अचानक बिगड़ी तबीयत, आज ही जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस, जानें पूरा मामला

Edited By meena, Updated: 03 Dec, 2025 08:21 PM

chhatarpur s deputy tehsildar ritu singhai suddenly fell ill

थप्पड़ कांड वाली छतरपुर की नायब तहसीलदार ऋतु सिंघई की अचानक तबियत बिगड़ी गई। आनन फानन में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है...

छतरपुर (राजेश चौरसिया) : थप्पड़ कांड वाली छतरपुर की नायब तहसीलदार ऋतु सिंघई की अचानक तबियत बिगड़ी गई। आनन फानन में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि कई दिनों से वे किसानों को खाद वितरण कार्य कर रहीं थी। आज सटई रोड पर खाद्य वितरण के दौरान किसानों से विवाद के कारण दिन भर मामला गर्माया रहा। जिसके बाद कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

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बता दें कि नायब तहसीलदार पर आज सुबह  मंडी परिसर में खाद लेने पहुंची एक छात्रा को कथित रूप से थप्पड़ मारने के आरोप लगे हैं। मामले को गंभीर आचरण उल्लंघन मानते हुए कलेक्टर ने कहा कि यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के विपरीत है।

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क्या था मामला

पीड़िता छात्रा का आरोप है कि उसने ऋतु सिंघई से कहा कि वह दो महीने से खाद लेने आ रही है, लेकिन नहीं मिल रही। उसने टोकन मांगा। ऋतु सिंघई ने कहा कि महिलाओं को टोकन नहीं मिलेंगे, केवल पुरुषों को मिलेंगे। दोबारा टोकन मांगा तो तहसीलदार ने थप्पड़ मार दिया।

खाद की कालाबाजारी के भी लगे आरोप

गुड़िया (पीड़िता) ने आरोप लगाया कि 15 ट्रक खाद रखी हुई है, लेकिन उसे ब्लैक में बेचा जा रहा है। उसने नायब तहसीलदार पर भी मिलीभगत और कमीशन लेकर खाद की कालाबाजारी करवाने का आरोप लगाया। गुड़िया ने कहा कि लगभग 250 महिलाएं रात 2 बजे से खाद के लिए लाइन में खड़ी हैं, लेकिन किसी को खाद नहीं मिल रही है। गुड़िया के अनुसार, टोकन चार-चार दिन तक बांटे जा रहे हैं, लेकिन पैसे देने के बाद भी खाद नहीं मिल रही है। यह कैसा नियम है और तहसीलदार को थप्पड़ मारने का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

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नायब तहसीलदार ने दी सफाई

वहीं ऋतु सिंघई ने कहा कि लोग अव्यवस्था फैला रहे हैं। धक्कामुक्की और एक दूसरे को खींच रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ तो हम पर आरोप लगा रहे हैं और कॉलर तक को खींच रहे हैं। और हमारा इतने पास से वीडियो बना रहे हैं।

वहीं लोगों का कहना है कि बच्ची स्कूल छोड़ कर एक महीने से खाद के लिए परेशान है। व्यवस्था बनाना प्रशासन का काम है। टाइम पर खाद देना चाहिए न लेकिन किसानों को  खाद नहीं मिल रहा है।

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