‘मुसलमानों से कागज मांगते-मांगते शंकराचार्य से कागज मांगने लगे भाजपाई’ कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार को सुनाई खरी-खरी

Edited By meena, Updated: 22 Jan, 2026 03:14 PM

deepak baij s statement on the insult to shankaracharya swami avimukteshwaranand

प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस इसे सनातन का विरोध बताते हुए भाजपा को खरी खरी सुना...

रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह) : प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस इसे सनातन का विरोध बताते हुए भाजपा को खरी खरी सुना रही है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए सरकार और भाजपा को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने मनरेगा और जमीनों की गाइडलाइन की दरों को लेकर भी सरकार को घेरा।

दीपक बैज ने कहा कि प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शाही स्नान से रोके जाने और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार की हम कड़ी आलोचना करते है। खुद को हिंदुओं का मसीहा बताने वाली भाजपा सरकार हिंदु संतों का अपमान कर रही है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 40 वर्षों से नियमित रूप से शाही स्नान करते आ रहे हैं और यह पहली बार है जब उन्हें इस अखंड धार्मिक परंपरा से रोका गया है। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या का शाही स्नान एक अखंड परंपरा है, भाजपा सरकार ने शंकराचार्य जी को स्नान से रोक कर सनातन परंपरा का अपमान किया है।भाजपा भगवान शंकराचार्य की सत्ता को चुनौती देने का दुस्साहस कर रही है। किसी भी राजनैतिक दल सरकार मुख्यमंत्री या प्रशासन को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन शंकराचार्य है।

यूपी की भाजपा सरकार द्वारा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना समूचे हिन्दू धर्म का अपमान है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अविमुक्तेश्वरानंद के सामने सिर झुकाया था, तब वह शंकराचार्य थे? जब तक उन्होंने गोहत्या पर सरकार से सवाल नहीं उठाया, तब तक वह शंकराचार्य थे? जब तक उन्होंने मंदिर के अधूरे प्राण प्रतिष्ठा का विरोध नहीं किया, तब तक वह शंकराचार्य थे? लेकिन अब वह शंकराचार्य नहीं रहे क्योंकि उन्होंने राजा के सामने सिर नहीं झुकाया। इसीलिए आज योगी उनसे दस्तावेज मांग रहे हैं? उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि बीजेपी के लोग मुसलमानों से कागज दिखाने को कहते थे। अब स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि वे एक शंकराचार्य से कागज़ मांग रहे हैं।

मनरेगा बचाओ संग्राम में कांग्रेस मजदूरों की हक की आवाज उठा रही

मोदी सरकार ने ग्रामीण भारत को रोजगार देने वाले कानून मनरेगा के स्वरूप में परिवर्तन कर दिया है। कांग्रेस, सरकार के इस कदम का पूरे देश में विरोध कर रही है। छत्तीसगढ़ में भी हम मनरेगा बचाओ संग्राम का आयोजन लगातार कर रहे है, जिसके तहत हमने प्रेस कांफ्रेंस, मौन धरना तथा जनसंपर्क पदयात्रायें आयोजित कर रहे है। प्रदेश के अनेकों जिलों बस्तर, रायपुर, राजनांदगांव, बेमेतरा, महासमुंद, धमतरी, बिलासपुर जिलों में मैं स्वयं पदयात्राओं में शामिल हुआ। मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।

मोदी सरकार ने “सुधार“ के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जानबूझकर की गई कोशिश है। अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है। मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोज़गार बंद करने की इजाज़त देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। कांग्रेस मनरेगा बचाओ संग्राम का और विस्तार करेगी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के तहत पूरे फरवरी माह तक हमारा आंदोलन चलेगा।

जमीनों की गाइड लाइन की दर पर सरकार का अनिर्णय जनता पर भारी

  • जमीनों के गाईड लाईन की दरों को विसंगतिपूर्ण और बेतहाशा बढ़ाने के बाद जब विरोध हुआ तो सरकार ने उस पर रोक लगा दिया और 15 दिनों में फैसले की बात कही गयी।
  • 1 माह से अधिक हो गया सरकार अनिर्णय की स्थिति में है। सरकार के इस अनिर्णय के कारण जमीन की खरीदी बिक्री लगभग बंद है। आम आदमी किसान, व्यापारी सभी परेशान है।
  • इससे साबित हो रहा कि सरकार में फैसला लेने की क्षमता नहीं बची है या सरकार की अपनी गुटबाजी के कारण गाइड लाइन की दरों पर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है।
  • हमारी मांग है कि पिछले साल की गाइडलाइन को ही सरकार तत्काल लागू करे।

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