यूरिया की एक बोरी के लिए 4 किमी दौड़े अन्नदाता..थाने में मिले टोकन, रो पड़ी महिला किसान, बोली- भूखी प्यासी हूं, खाद नहीं मिली

Edited By meena, Updated: 05 Dec, 2025 08:57 PM

farmers ran 4 km for a bag of urea received tokens at the police station

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के हरपालपुर में शुक्रवार को वह तस्वीरें सामने आईं जिन्होंने हर उस व्यक्ति का दिल दहला दिया जो खुद को किसानों का हितैषी बताता है। अन्नदाता अपनी ही भूमि की खाद...

छतरपुर (राजेश चौरसिया) : मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के हरपालपुर में शुक्रवार को वह तस्वीरें सामने आईं जिन्होंने हर उस व्यक्ति का दिल दहला दिया जो खुद को किसानों का हितैषी बताता है। अन्नदाता अपनी ही भूमि की खाद के लिए सड़क पर 4 किलोमीटर दौड़ते हुए दिखाई दिए। स्थिति यह थी कि जहां टोकन था, वहां खाद नहीं और जहां खाद थी, वहां बिना टोकन के किसान बेबस खड़े थे।

प्रशासन ने इस बार कृषि उपज मंडी और मार्कफेड गोदाम को छोड़ खाद वितरण की जिम्मेदारी सीधे थाने को सौंप दी। नतीजतन, सुबह 5 बजे ही हजारों किसान मार्कफेड गोदाम पहुंच गए, लेकिन वहां से एक ही जवाब मिला पहले थाने से टोकन लाओ।

550 टोकन और हजारों किसान, कौन पाएगा खाद?

मार्कफेड गोदाम में कुल 700 बोरी यूरिया का स्टॉक था, जबकि जरूरतमंद किसान हजारों की संख्या में पहुंचे थे। ऐसे में थाने से केवल 550 टोकन ही बांटे गए। स्पष्ट था कि हर किसान को सिर्फ एक बोरी ही मिल सकेगी।

कई किसान दूरस्थ गांवों से पैदल ही यूरिया लेने आए थे। उनका मानना था कि जल्दी पहुंचने पर खाद मिल जाएगी, लेकिन उन्हें गोदाम से थाने और फिर थाने से गोदाम तक कुल 4 किलोमीटर की 'अधिकारी-निर्मित परिक्रमा करनी पड़ी। भूख, प्यास और थकान से परेशान किसान निराश होकर लौटते दिखे।

बीते दिनों खाद वितरण के दौरान नायब तहसीलदार द्वारा एक महिला किसान को थप्पड़ मारने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षित व सुव्यवस्थित वितरण का दावा किया था। लेकिन सवाल यह है क्या सावधानी का मतलब किसानों को 4 किमी दौड़ाना है? क्या अव्यवस्था दूर हुई या किसान और अधिक परेशान कर दिए गए? थाने का स्टाफ टोकन बांट रहा था, गोदाम का स्टाफ खाद और किसान इन दोनों के बीच अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया।

गुस्से में कई किसानों ने कहा..

सरकार कहती है अन्नदाता भगवान हैं, पर इस भगवान की क्या हालत कर दी है? एक महिला किसान रोते हुए बोली सुबह से भूखी खड़ी हूं, न खाद मिली न पानी। आखिर गलती हमारी क्या है? किसानों की चिंता यह भी है कि खेती का सीजन शुरू हो चुका है, और खाद वितरण में देरी होने से फसल पर सीधा असर पड़ेगा।

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