Edited By Vikas Tiwari, Updated: 16 Feb, 2026 07:47 PM

मध्यप्रदेश के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी 2026 में 1,80,779 रुपए प्रति 10 ग्राम (10 Gram 24 Karat Gold Rate) का रिकॉर्ड स्तर छूने वाला सोना अब अपने उच्चतम स्तर से करीब 13.50% यानी लगभग रुपए 24,500 तक टूट...
भोपाल: मध्यप्रदेश के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी 2026 में 1,80,779 रुपए प्रति 10 ग्राम (10 Gram 24 Karat Gold Rate) का रिकॉर्ड स्तर छूने वाला सोना अब अपने उच्चतम स्तर से करीब 13.50% यानी लगभग रुपए 24,500 तक टूट चुका है। सोमवार को एमसीएक्स (MCX) पर सोना 0.61% गिरकर रुपए 1,54,937 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अभी थमी नहीं है और आने वाले समय में कीमतों में और नरमी देखी जा सकती है। यहां तक की एक्सपर्ट्स का दावा है कि अभी सोने का दाम आने वाले दिनों में 1 लाख तक आ सकता है। (Gold-Silver Rate)
रूस का ‘यू-टर्न’ और डॉलर की वापसी
सोने (Gold Rate) में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह रूस का अमेरिकी डॉलर के प्रति बदलता रुख माना जा रहा है। लंबे समय से डी-डॉलराइजेशन की नीति पर चल रहे रूस ने अब अमेरिका के साथ डॉलर में व्यापार की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। ब्रिक्स (BRICS) देशों द्वारा डॉलर को चुनौती देने के लिए गोल्ड-बेस्ड ट्रेड सिस्टम की जो रणनीति बनाई जा रही थी, उस पर भी इसका असर पड़ा है। रूस की संभावित वापसी से सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग कमजोर हुई है।
केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि 2020 से 2024 के बीच वैश्विक स्वर्ण खरीद का लगभग 50% हिस्सा ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने किया। इसके अलावा, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और संभावित टैरिफ नीतियों के डर से भी केंद्रीय बैंकों ने बड़े पैमाने पर सोना खरीदा, जिससे कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। अब वही मांग धीमी पड़ती दिख रही है।
क्या ₹1 लाख से नीचे आएगा सोना?
बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि पहले डिजिटल और पेपर गोल्ड में बिकवाली तेज होगी, जिसका असर फिजिकल गोल्ड पर भी पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $3,000 प्रति औंस तक गिर सकता है। भारत में कीमतें 1,00,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे जाने की आशंका जताई जा रही है। बाजार में आने वाली हल्की तेजी को एक्सपर्ट ‘डेड कैट बाउंस’ यानी अस्थायी उछाल बता रहे हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर डॉलर, ब्रिक्स रणनीति और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की खरीद नीति पर टिकी है।