Edited By meena, Updated: 25 Jul, 2026 04:32 PM

देवशयनी एकादशी के साथ आज से चातुर्मास का शुभारंभ हो गया है। शनिवार, 25 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल एकादशी के अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है...
उज्जैन (विशाल सिंह) : देवशयनी एकादशी के साथ आज से चातुर्मास का शुभारंभ हो गया है। शनिवार, 25 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल एकादशी के अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आज के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीने तक सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। भगवान विष्णु का जागरण कार्तिक शुक्ल एकादशी, यानी देवउठनी एकादशी के दिन होता है।
चातुर्मास को सनातन धर्म में साधना, आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष काल माना जाता है। इसी अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं। वहीं जप, तप, व्रत, दान, धार्मिक ग्रंथों का पाठ, सत्संग, कथा-श्रवण और तीर्थाटन का विशेष महत्व बताया गया है।
महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी महेश गुरु के अनुसार, प्राचीन काल से वर्षा ऋतु में ऋषि-मुनि एक स्थान पर रहकर धर्मोपदेश देते थे। इसी परंपरा से चातुर्मास और कल्पवास की शुरुआत हुई। आज भी संत-महात्मा इन चार महीनों में एक ही स्थान पर रहकर भागवत कथा, रामकथा, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान सूर्य दक्षिणायन में रहते हैं। इसे देवशक्ति की साधना का समय माना गया है, इसलिए श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु, भगवान शिव और तुलसी की नियमित पूजा, व्रत, जप-तप और दान-पुण्य करने की प्रेरणा दी जाती है। श्रावण से लेकर कार्तिक तक चलने वाले इस पवित्र काल में जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, पितृपक्ष, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख पर्व भी मनाए जाएंगे।