Edited By Desh Raj, Updated: 06 May, 2026 10:14 PM

सिंहस्थ-2028 को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस और रेलवे प्रशासन ने कमर कस ली है। बुधवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक में 'प्रयागराज महाकुंभ-2025' के सफल अनुभवों को...
भोपाल (इजहार खान): सिंहस्थ-2028 को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस और रेलवे प्रशासन ने कमर कस ली है। बुधवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक में 'प्रयागराज महाकुंभ-2025' के सफल अनुभवों को सिंहस्थ में लागू करने पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा सहित रेलवे, GRP और RPF के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
30 करोड़ श्रद्धालुओं का प्रबंधन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक
उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया कि सिंहस्थ-2028 (9 अप्रैल से 8 मई) के दौरान लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। शाही स्नान के दिनों में यह संख्या एक ही दिन में 5 करोड़ तक पहुँच सकती है। इसके लिए:
* घाटों का विस्तार: मेला क्षेत्र को 3100 हेक्टेयर में विकसित किया जा रहा है और घाटों की लंबाई बढ़ाकर 37 किमी की जा रही है।
* ICCC व्यवस्था: भीड़ नियंत्रण के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) और AI आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।
* होल्डिंग एरिया: यात्रियों को सीधे प्लेटफॉर्म पर भेजने के बजाय 'होल्डिंग एरिया' में रोका जाएगा ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
रेलवे की तैयारी: 3 गुना अधिक चलेंगी मेला स्पेशल ट्रेनें
बैठक में निर्णय लिया गया कि 2016 के सिंहस्थ की तुलना में इस बार तीन गुना अधिक विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।
* शॉर्ट-डिस्टेंस ट्रेनें: पेंडुलम मूवमेंट के आधार पर कम दूरी की मेला ट्रेनें चलेंगी।
* इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: उज्जैन, इंदौर, देवास और सैटेलाइट स्टेशनों पर नए फुटओवर ब्रिज, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और त्रिस्तरीय पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है।
* एंट्री-एग्जिट प्लान: प्लेटफॉर्म पर भीड़ के टकराव को रोकने के लिए प्रवेश और निकास के रास्ते पूरी तरह अलग रखे जाएंगे।
डीजीपी के निर्देश: समन्वय और सतर्कता सर्वोपरि
DGP कैलाश मकवाणा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि रेलवे और जिला प्रशासन के बीच 'रियल-टाइम' समन्वय होना चाहिए। उन्होंने कहा, "अंतिम समय में प्लेटफॉर्म परिवर्तन से हर हाल में बचा जाए।" वहीं, यूपी के डीजी (रेल) प्रकाश डी. ने प्रयागराज के अनुभवों को साझा करते हुए 'कलर कोडिंग' और 'डिजिटल समन्वय' के महत्व पर जोर दिया। RPF डीजी सोनाली मिश्रा ने सुरक्षा और इंटेलिजेंस को मजबूत करने की बात कही।