बाबा बागेश्वर की कथा में 2 बच्चों संग मुस्लिम महिला ने अपनाया सनातन,बोली-नहीं चाहिए मुस्लिम धर्म,पूजा –पाठ वाली दुनिया बहुत अच्छी

Edited By Desh sharma, Updated: 10 Jan, 2026 09:54 PM

muslim woman along with her two children embraced sanatan dharma

महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव में चल रही बागेश्वर महाराज की श्रीराममय हनुमान चालीसा कथा में एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। कथा के चौथे दिन कथा विराम आरती से पूर्व गोंदिया नगर की निवासी एक मुस्लिम महिला ने अपने दोनों बच्चों के साथ...

छतरपुर (राजेश चौरसिया): महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव में चल रही बागेश्वर महाराज की श्रीराममय हनुमान चालीसा कथा में एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। कथा के चौथे दिन कथा विराम आरती से पूर्व गोंदिया नगर की निवासी एक मुस्लिम महिला ने अपने दोनों बच्चों के साथ स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया।

महाकाल के दर्शन कर चुकी हूं, पूजा पाठ वाली दुनिया बहुत अच्छी

बागेश्वर महाराज ने महिला और उसके दोनों बच्चों को मंच पर बुलाया और उपस्थित श्रद्धालुओं को जानकारी दी कि इनका धर्म परिवर्तन मंच पर आने से पूर्व प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नोटरी शपथ पत्र पर, पूरी निष्पक्षता और वैधानिक तरीके से संपन्न किया गया है। इसके पश्चात समाज के समक्ष कथा मंच से सनातन धर्म अपनाने पर उन्होंने तीनों का स्वागत किया,कथा पंडाल में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु कथा का रसपान करने पहुंच रहे हैं।

नहीं चाहिए मुस्लिम धर्म, सनातन की दुनिया ही अलग

इसी क्रम में कथा मंच के माध्यम से पूर्व में हिंदू रहे लोगों की घर वापसी तथा अन्य धर्मों से आए परिवारों द्वारा सनातन धर्म अपनाने का सिलसिला भी निरंतर जारी है। इस अवसर पर बागेश्वर महाराज ने महिला और उसके दोनों बच्चों का तिलक कर, पट्टिका पहनाकर सनातन धर्म में विधिवत स्वागत किया।

मुस्लिम महिला बोली- उनका बेटा भी मां काली की कृपा से हुआ है

महिला का पूर्व नाम परवीन मौसिम शेख, पुत्री का नाम जुमेरा मोशीन शेख तथा पुत्र का नाम रजा मौसिन शेख था। सनातन धर्म अपनाने के बाद महिला का नाम जया जैकी दास, पुत्र का नाम राजू जैकी दास और पुत्री का नाम जय श्री जैकी दास रखा गया,जया जैकी दास ने मंच से बताया कि उन्हें मुस्लिम समाज में रहकर सहज अनुभव नहीं होता था।

उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से बाबा महाकाल और मां काली की उपासना करती आ रही हैं,उन्होंने बताया कि वे अपने पुत्र को मां काली की कृपा मानती हैं और उनका पुत्र भी नियमित रूप से मां काली की पूजा करता है। बीते कुछ महीनों से वे बागेश्वर महाराज के प्रवचन और वीडियो देख रही थीं। जैसे ही उन्हें आमगांव में कथा की जानकारी मिली, वे स्वयं संपर्क कर कथा स्थल पर पहुंचीं और बिना किसी दबाव या भय के स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया

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