दिग्विजय सिंह ने बुलाया तो आया...चर्चा में भाजपा के कद्दावर नेता और दिग्गी राजा की नजदीकियां, सियासी अटकलें शुरु

Edited By meena, Updated: 18 Nov, 2025 11:33 AM

politics surrounding the closeness of digvijay singh and narendra singh tomar

मालवा की राजनीति कुछ ऐसी है, जहां छोटी-छोटी बातों के भी बड़े मायने होते हैं। इस इलाके के नेता कुछ भी कहें, उसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है...

गुना (मिस्बाह नूर) : मालवा की राजनीति कुछ ऐसी है, जहां छोटी-छोटी बातों के भी बड़े मायने होते हैं। इस इलाके के नेता कुछ भी कहें, उसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। फिर चाहे वे 5 साल पहले भाजपा का दामन थामने वाले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हों। जिनका एक भाषण साल 2020 में मध्यप्रदेश की सत्ता परिवर्तित करने की धुरी बन गया या फिर वर्तमान में केंद्रीय कृषि शिवराज सिंह चौहान, जो इस क्षेत्र के मुहाने पर बसे राघौगढ़ से साल 2003 में चुनाव लड़ते हैं और कुछ समय बाद ही देश-प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बन जाते हैं।

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चंबल-मालवा की राजनीति के एक और धुरंधर और अघोषित रूप से ग्वालियर-चंबल में अपनी ही पार्टी के बड़े प्रतिद्वंदी माने जाने वाले नरेंद्र सिंह तोमर का दिग्विजय प्रेम अब चर्चाओं में है। तारीख 17 नवंबर, मौका था पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय के गढ़, उनके गृह नगर राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के आवन स्थित आचार्य वाचस्पति शुक्ल संस्कृत वेद विद्यालय के त्रि-दिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का।

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कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया था। मंच पर बतौर मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष, भाजपा के दिग्गज नेता, पूर्व कृषि मंत्री और साल 2020 तक ग्वालियर-चंबल में भाजपा की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद थे।

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तोमर ने माइक थामा, औपचारिक भाषण शुरु किया। लेकिन, जैसे ही उन्होंने राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के आवन में आने की वजह बताई, तो मंच पर मौजूद भाजपाई भी दंग रह गए। इसके बाद सोशल मीडिया पर चर्चा होना तो लाजिमी थी। दरअसल, नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि उन्हें आवन आने के लिए दिग्विजय सिंह ने न्यौता दिया था। दिग्विजय ने उनसे कहा कि आवन के संस्कृत विद्यालय में तीन दिवसीय सम्मेलनम् हैं, आप आएंगे तो अच्छा होगा। नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक वे इसीलिए आवन आए हैं। 

नरेंद्र सिंह तोमर ने जिस तरह दिग्विजय सिंह का नाम लिया, उसके बाद सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। चर्चा है कि तोमर और सिंधिया के बीच शायद सबकुछ ठीक नहीं है। सिंधिया लम्बे समय से दिग्विजय के धुर विरोधी हैं। ऐसे में उनके विरोधी के बुलाने पर भाजपा में बड़ा कद रखने वाले नरेंद्र सिंह तोमर का आवन आना सामान्य घटनाक्रम नहीं माना जा रहा है। आवन स्थित संस्कृत विद्यालय के मंच पर जिस समय नरेंद्र सिंह तोमर पूर्व सीएम दिग्विजय का जिक्र कर रहे थे, तब उनके ठीक पीछे भाजपा के ही पूर्व मंत्री गोपीलाल जाटव, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा सहित तमाम बड़े नेता भी मौजूद नजर आए।

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बता दें कि आवन स्थित आचार्य वाचस्पति संस्कृत विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलनम् का शुभारंभ 15 नवंबर को पूर्व सीएम दिग्विजय ने किया था। इसका समापन नरेंद्र सिंह तोमर की मौजूदगी में हुआ। दोनों नेताओं की इस जुगलबंदी को राजनीतिक गलियारों में रोचक माना जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने आचार्य संस्कृति से जुड़े अपने अनुभव और विचार भी साझा किए। उन्होंने आचार्य शब्द का महत्व बताया। तोमर ने कहा कि आचार्य समाज का पथ प्रदर्शक होता है। आचार्य का एक-एक शब्द समाज का जीवन बनाने और बिगाड़ने का काम करता है। आध्यात्मिक क्षेत्र में भी आचार्य सर्वश्रेष्ठ है। आवन के संस्कृत विद्यालय की प्रशंसा करते हुए तोमर ने कहा कि वे और दिग्विजय सिंह इस विद्यालय के संचालन में पूरी मदद करेंगे।

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