Edited By meena, Updated: 28 Apr, 2026 05:36 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है। जहां दतिया विधानसभा से धोखाधड़ी केस में फंसे राजेंद्र भारती को बड़ा झटका लगा है...
दतिया : मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है। जहां दतिया विधानसभा से धोखाधड़ी केस में फंसे राजेंद्र भारती को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली है। कोर्ट द्वारा सुनाई गई 3 साल की सजा के चलते उनकी विधानसभा सदस्यता शून्य घोषित कर दी गई है, जिसके बाद दतिया विधानसभा सीट अब रिक्त मानी जा रही है। इस फैसले के साथ ही दतिया विधानसभा में उपचुनाव की संभावनाएं बढ़ गई है या यूं कहें कि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जो दतिया से भाजपा के मजबूत दावेदार प्रत्याशी है का रास्ता साफ हो गया है।
जी हां, इस फैसले के साथ ही दतिया में विधानसभा उपचुनाव का बिगुल बज सकता है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा मैदान में उतर सकते हैं। पहले ही संभावनाएं जताई जा रही थी कि भाजपा नरोत्तम मिश्रा को प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ सकती है। नरोत्तम मिश्रा की पकड़ बेहद मजबूत है और भाजपा नरोत्तम के जरिए दतिया में वापसी की राह तलाश सकती है।
सूत्रों की मानें तो दतिया उपचुनाव के लिए भाजपा ने अंदरखाते से तैयारी पूरी कर रखी है। अब आज के फैसले के बाद भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी और अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ऐसे में दतिया से नरोत्तम मिश्रा का नाम एक मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनकी पहचान और दतिया क्षेत्र में उनका प्रभाव भाजपा के लिए अहम साबित हो सकता है। दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से डॉ. मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है, जहां से वे तीन बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था। वर्तमान परिस्थितियों में सीट रिक्त होने के कारण उपचुनाव की स्थिति बन रही है, और ऐसे में डॉ. मिश्रा के फिर से मैदान में उतरने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
29 जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई
29 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई अब इस पूरे मामले में बेहद अहम मानी जा रही है, जिससे आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं, दतिया में संभावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अंदरखाने उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा शुरू हो चुकी है और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कवायद जारी है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह चुनावी मुकाबला किसके लिए फायदेमंद साबित होता है और किसके लिए चुनौतीपूर्ण। फिलहाल दतिया की सियासत में घमासान के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।