Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Jun, 2026 04:45 PM
राज्य में कांग्रेस अब अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद में जुट गई है।
रायपुर। राज्य में कांग्रेस अब अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 21 जून को छत्तीसगढ़ के दौरे पर आ सकते हैं। करीब ढाई साल बाद प्रस्तावित यह दौरा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन अभियान का अहम पड़ाव माना जा रहा है।सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी अभनपुर में आयोजित होने वाले विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेंगे, जहां वे करीब साढ़े तीन घंटे तक जिला कांग्रेस अध्यक्षों और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी।
9 दिन का प्रशिक्षण, संगठन को मिलेगी नई दिशा
प्रदेश कांग्रेस कमेटी 20 से 29 जून तक एक बड़े प्रशिक्षण शिविर के आयोजन की तैयारी कर रही है। इस शिविर में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा के जिला कांग्रेस अध्यक्षों को भी शामिल किए जाने की योजना है। कार्यक्रम का प्रस्ताव राहुल गांधी के कार्यालय को भेजा जा चुका है और अंतिम स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के मुता
बिक पार्टी का लक्ष्य बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय और प्रभावी बनाना है। इसी उद्देश्य से हाल ही में नियुक्त 41 जिला कांग्रेस अध्यक्षों को संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी प्रबंधन और जनसंपर्क की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, मिलेगा परफॉर्मेंस टास्क
इस बार का प्रशिक्षण शिविर पारंपरिक भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस नेतृत्व प्रत्येक जिलाध्यक्ष को स्पष्ट जिम्मेदारियां और लक्ष्य सौंपने की तैयारी में है। कमजोर बूथों की पहचान, नाराज मतदाता वर्गों तक पहुंच, स्थानीय मुद्दों पर आंदोलन की रणनीति और संगठन विस्तार जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आगामी चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए जिला स्तर पर मजबूत नेतृत्व तैयार करना जरूरी है। इसी वजह से प्रशिक्षण को पूरी तरह परिणाम आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है।
राहुल करेंगे वन-टू-वन चर्चा
कार्यक्रम की सबसे खास बात राहुल गांधी की जिला अध्यक्षों के साथ व्यक्तिगत बातचीत होगी। वे प्रत्येक जिले की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों, स्थानीय चुनौतियों, संगठन की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर सीधे फीडबैक लेंगे।जिलाध्यक्षों को यह बताना होगा कि उनके क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे क्या हैं, जनता किन समस्याओं से जूझ रही है और राज्य सरकार को किन मुद्दों पर प्रभावी ढंग से घेरा जा सकता है। साथ ही उन्हें अपने अब तक के कार्यों और आगामी योजनाओं का भी ब्यौरा देना होगा।
खड़गे समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता होंगे शामिल
कांग्रेस के इस संगठनात्मक अभियान में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता भी प्रशिक्षण शिविर में मौजूद रह सकते हैं।
मीडिया और सोशल मीडिया की भी मिलेगी ट्रेनिंग
कांग्रेस नेतृत्व जिलाध्यक्षों को मीडिया मैनेजमेंट, सोशल मीडिया कैंपेन, जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और सरकार की नीतियों पर विपक्षी रणनीति तैयार करने का प्रशिक्षण भी देगा। साथ ही विरोध-प्रदर्शन के आधुनिक तरीकों और जनता के साथ संवाद बढ़ाने के उपायों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
2028 की तैयारी का शुरुआती संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह प्रशिक्षण शिविर केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक रणनीति की नींव भी साबित हो सकता है। कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के जरिए बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में राहुल गांधी का प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और भविष्य की चुनावी रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।