Edited By meena, Updated: 07 Apr, 2026 12:55 PM

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज को फोन करके बुरी तरह कानूनी पेंच में फंसे विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही
भोपाल : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज को फोन करके बुरी तरह कानूनी पेंच में फंसे विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। आपराधिक अवमानना के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान विधायक की ओर से एक हलफनामा पेश किया गया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी है। कोर्ट ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय की है। अब इस तारीख को विधायक को खुद अदालत में उपस्थित होना होगा।
यह पूरा विवाद कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि अवैध खनन मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश जस्टिस विशाल मिश्रा से विधायक ने सीधे संपर्क किया। इसके बाद जस्टिस मिश्रा ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठे।
विधायक की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत में दलील दी कि आपराधिक अवमानना के मामलों में सजा तभी दी जाती है जब गलती गंभीर और अक्षम्य हो या आरोपी अपनी गलती स्वीकार न करे। उन्होंने कहा कि संजय पाठक ने अपनी गलती मानते हुए बिना शर्त माफी मांग ली है, इसलिए अदालत को नरमी बरतनी चाहिए।
गौरतलब है कि संजय पाठक पहले से ही अवैध खनन के आरोपों को लेकर चर्चा में हैं। उनसे जुड़ी पारिवारिक फर्मों पर अनुमति से अधिक खनन करने का आरोप है, जिस पर प्रशासन ने करीब 443 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर न्यायाधीश से संपर्क करने की बात सामने आई, जिसने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया।
अब यह मामला सिर्फ खनन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और प्रक्रिया की निष्पक्षता से भी जुड़ गया है। आने वाली 21 अप्रैल की सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और विधायक को किस तरह की राहत या कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।