श्रीमंत शंकर देव के विचारों को समर्पित शोध पीठ का लोकार्पण, रायपुर से गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश
Edited By Vikas Tiwari, Updated: 21 Jan, 2026 05:46 PM

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आज महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकर देव को समर्पित श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का भव्य लोकार्पण किया गया। इस शोध पीठ की स्थापना राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर की गई है।
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आज महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकर देव को समर्पित श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का भव्य लोकार्पण किया गया। इस शोध पीठ की स्थापना राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर की गई है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल जी (सह-सरकार्यवाह, आरएसएस), शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए, जिससे दोनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थी अंतर विषयक अनुसंधान कर सकेंगे।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार सामाजिक समरसता, समानता और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि यह शोध पीठ उत्तर-पूर्व और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक स्तर पर जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु चालू वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव की लेखनी और विचारों पर पूरा देश गौरवान्वित है। उन्होंने 500 वर्ष पूर्व ‘एक भारत’ की भावना को साकार करने वाले संत के रूप में श्रीमंत शंकरदेव के योगदान को रेखांकित किया और कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ के माध्यम से उसी विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव ने विविध जनजातियों और समाज को भक्ति, संस्कृति और सामाजिक सद्भाव के सूत्र में बांधने का ऐतिहासिक कार्य किया। वहीं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि यह शोध पीठ केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों और भारतीय ज्ञान परंपरा की कार्यशाला बनेगी। कार्यक्रम के अंत में आशा व्यक्त की गई कि यह शोध पीठ भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सांस्कृतिक एकता का सशक्त केंद्र बनकर उभरेगी।
Related Story

रायपुर साहित्य उत्सव–2026’ की तैयारियां जोरों पर, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने किया निरीक्षण

छत्तीसगढ़ ने स्थापित किया राष्ट्रीय मानक, रायपुर की IPHL देश की पहली NQAS प्रमाणित प्रयोगशाला बनी

पढ़ाई के साथ अनुभव का पाठ: घोटवानी शाला के बच्चों का शैक्षिक भ्रमण, रायपुर की सांस्कृतिक धरोहरों से...

फ्री-फ्री-फ्री! साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष सुविधा, रायपुर साहित्य उत्सव में निशुल्क सफर कर...

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: नई आबकारी नीति को मंजूरी, नवा रायपुर में NMIMS और स्टार्ट-अप हब को...

डबलिन में गूंजा छत्तीसगढ़ का रंग, आयरलैंड तक पहुँची लोकसंस्कृति की पहचान

किसानों को समर्पित 2026: CM मोहन यादव करेंगे ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का भव्य शुभारंभ, अन्नदाताओं को...

मनोकामना पूरी होने पर भक्त ने बाबा महाकाल को चढ़ाया 2.35 किलो का चांदी का मुकुट, महाकाल के जयकारों...

इंतजार खत्म...रामलला के दर्शन के लिए 850 श्रद्धालु रवाना, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा स्टेशन,...

WEF Davos में गूंजा मध्यप्रदेश का पर्यटन विज़न, CM मोहन ने बताया ‘नए युग’ का रोडमैप