गोबर-गोमूत्र घोटाले ने हिला दिया MP, रिसर्च के लिए मिले पैसों से लूटे मजे, हवाई जहाज से सैर तो सपाटे के लिए खरीदी कार

Edited By Desh sharma, Updated: 10 Jan, 2026 04:40 PM

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मध्य प्रदेश में एक ऐसा घोटाला हुआ है जिसने हड़कंप मचा दिया है। ये घोटाला और घोटालों से अलग है और जो भी इसके बारे में जान रहा है उसके पैरों तले जमीन खिसक रही है। दरअसल संस्कारधानी जबलपुर में हुए इस घोटाले ने सनसनी मचा दी है।

(जबलपुर): मध्य प्रदेश में एक ऐसा घोटाला हुआ है जिसने हड़कंप मचा दिया है। ये घोटाला और घोटालों से अलग है और जो भी इसके बारे में जान रहा है उसके पैरों तले जमीन खिसक रही है। दरअसल संस्कारधानी जबलपुर में हुए इस घोटाले ने सनसनी मचा दी है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने गोबर और गोमूत्र पर घोटाला कर डाला है।

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इस कांड ने सभी कांडो को पीछे छोड़ा

इस कांड ने अब तक हुए सभी कांडो को पीछे छोड़ दिया है। अगर आपको लग रहा है कि ये  घोटाला हजारों या लाखो का है तो भूल जाइए ...घोटाला करोड़ों का है। घोटाले को अंजाम देने वाले  भ्रष्टाचारी गोमूत्र और गोबर के नाम पर साढ़े 3 करोड़  रुपये हजम कर गए और डकार भी नहीं लिया।

रिसर्च के नाम पर मिले 3.5 करोड़ रुपये में से बड़ा हिस्सा मौज पर खर्चा

दरअसल जबलपुर में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय का ये कारनामा आजकल सुर्खियों में है। गोबर-गौमूत्र से कैंसर जैसी बीमारियों पर रिसर्च के नाम पर मिले 3.5 करोड़ रुपये में से बड़ा हिस्सा अनुचित कामों में खर्च कर दिया गया।  जैसे ही इस मामले की जांच शुरू चौंकाने वाले खुलासे हुए।

“पंचगव्य योजना” को बना दिया “घोटाला योजना”

जानकारी के मुताबिक साल 2011 में पंचगव्य योजना के तहत विश्वविद्यालय ने रिसर्च के नाम पर सरकार से 8 करोड़ की मांगे थे। सरकार ने इसके लिए  3 करोड़ 50 लाख स्वीकृत किए। इसका मकसद था गाय से मिलने वाले पांच तत्वों (गोबर, गौमूत्र, दूध) से कैंसर जैसी बीमारियों पर रिसर्च करना। लेकिन 10 साल के रिसर्च के बाद भी इलाज खोजने में यूनिवर्सिटी नाकाम रही।

सरकारी फंड के दुरुपयोग का आरोप

आरोप है कि  सरकारी फंड को वेटरनरी विश्वविद्यालय की टीम ने सैर सपाटा करके खर्च कर दिया। रिसर्च के लिए मिले पैसों  रुपयों से मौज की गई। गोवा, मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद सहित  देश के कई बड़े शहरों में सैर की गई।  कार खरीदी गई और किसानों को कागजों पर ही ट्रेनिंग दे दी।

यही नहीं आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि इसी फंड से कार खरीदी गई, और घूमने-फिरने के लिए डीजल के साथ ही गाड़ी मरम्मत में 8 लाख रुपए खर्च किए गए। भिंड, मुरैना के साथ ही कई जिलों के किसानों को कागजों पर ट्रेनिंग तक दे दी।

इस घोटाले से जुड़ी शिकायत कलेक्टर को मिली है, जांच के बाद करोड़ों रुपए का घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।अब तक की जांच में कई अधिकारी और कर्मचारी राडार पर हैं। फिलहाल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की तफ्तीश जारी है।

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