खतरे में मंत्री प्रतिमा बागरी की कुर्सी, जाति प्रमाण पत्र को लेकर नए एक्शन से हड़कंप

Edited By meena, Updated: 04 Jul, 2026 06:42 PM

trouble mounts for minister pratima bagri she could lose her post

मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सतना जिले में कलेक्टर के निर्देश पर गांव हरदुआ मझोल में मुनादी कराई गई है...

भोपाल (इजहार खान) : मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सतना जिले में कलेक्टर के निर्देश पर गांव हरदुआ मझोल में मुनादी कराई गई है। यह कार्रवाई 6 जुलाई को होने वाली छानबीन समिति की सुनवाई से पहले की गई है।

राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में सतना प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कलेक्टर के निर्देश पर नागौद तहसील के हरदुआ मझोल गांव में डुगडुगी बजाकर मुनादी कराई गई। प्रशासन की ओर से लोगों को जानकारी दी गई कि जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले की जांच जारी है और 6 जुलाई को भोपाल स्थित वल्लभ भवन में गठित छानबीन समिति के समक्ष इस मामले की सुनवाई होनी है।

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मुनादी के दौरान यह भी बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस मामले से जुड़े दस्तावेज, तथ्य या कोई आपत्ति है, तो वह निर्धारित तिथि पर छानबीन समिति के समक्ष अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है।

बताया जा रहा है कि यह मामला बागरी समाज के कुछ लोगों को जारी अनुसूचित जाति के जाति प्रमाण पत्रों को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है। इस संबंध में अलग-अलग पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों पर अंतिम फैसला छानबीन समिति की जांच और शासन की प्रक्रिया के बाद ही होगा। अब सभी की निगाहें 6 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

ये है पूरा मामला?
पूरा विवाद प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर है और उन्होंने अनुसूचित जाति के प्रमाण-पत्र के आधार पर सतना जिले की आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में नगरीय विकास राज्यमंत्री बनाया गया। लेकिन कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने उनके जाति प्रमाण पत्र को हाईकोर्ट याचिका दायर करते हुए चुनौती दी। उनका दावा है कि बागरी जिस बागरी समुदाय से आती है वह समाज अनुसूचित जाति की लिस्ट में नहीं आता है। याचिका में दावा किया गया है प्रतिमा बागरी राजपूत या ठाकुर समुदाय से है, सिर्फ आरक्षित सीट से जीत हासिल करने के लिए उन्होंने जाति सर्टिफिकेट का सहारा लिया जो कानूनी तौर पर गलत है।

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