परिक्रमा पथ या जमीन का खेल? डोंगरगढ़ में 11 किसानों की जमीन खरीद पर उठे सवाल

Edited By Vandana Khosla, Updated: 13 Jun, 2026 06:11 PM

a circumambulation path or a land deal questions raised

डोंगरगढ़ (हेमंत पाल): धर्मनगरी डोंगरगढ़ में प्रस्तावित 8 किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। धार्मिक पर्यटन और विकास के नाम पर बनाई जा रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब किसानों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि...

डोंगरगढ़ (हेमंत पाल): धर्मनगरी डोंगरगढ़ में प्रस्तावित 8 किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। धार्मिक पर्यटन और विकास के नाम पर बनाई जा रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब किसानों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जहां परियोजना के लिए पर्याप्त शासकीय और राजस्व भूमि उपलब्ध है, वहां 11 किसानों की निजी जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों का दावा है कि उन्हें न तो पूरा प्रोजेक्ट दिखाया गया और न ही यह बताया गया कि उनकी जमीन का कितना हिस्सा अधिग्रहित या खरीदा जाएगा। इस बीच भू-माफियाओं और कथित भूमि कारोबारियों की भूमिका को लेकर भी संदेह गहराने लगा है।

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डोंगरगढ़ की पहचान केवल एक धार्मिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र के रूप में भी है। मां बम्लेश्वरी मंदिर से जुड़े धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा परिक्रमा पथ परियोजना की योजना बनाई गई है। लेकिन परियोजना शुरू होने से पहले ही यह सवालों और विवादों के घेरे में आ गई है।

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कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार ग्राम छिरपानी के 11 भू-स्वामियों की निजी भूमि खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है। सूचना सामने आते ही प्रभावित किसानों में नाराजगी फैल गई। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने उनसे संवाद स्थापित करने के बजाय केवल औपचारिक सूचना जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है।

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प्रभावित किसानों का आरोप है कि परियोजना का विस्तृत नक्शा, रूट प्लान और तकनीकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि उनकी जमीन का कौन-सा हिस्सा प्रस्तावित मार्ग में शामिल है। इससे किसानों में असमंजस और अविश्वास का माहौल बन गया है।

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मामले को और गंभीर बनाता है किसानों का यह आरोप कि विभागीय अधिकारियों की जगह कुछ निजी लोग और कथित जमीन कारोबारी उनसे संपर्क कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि यह पूरी तरह सरकारी परियोजना है तो बातचीत और प्रक्रिया सरकारी अधिकारियों के माध्यम से ही होनी चाहिए। निजी व्यक्तियों की सक्रियता कई सवाल खड़े करती है।

विवाद का केंद्र बिंदु यह है कि प्रशासन ने अब तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि निजी भूमि खरीदने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ रही है। किसानों का दावा है कि प्रस्तावित क्षेत्र में पर्याप्त सरकारी और राजस्व भूमि उपलब्ध है। उनका कहना है कि मौजूदा रास्तों का उन्नयन कर और शासकीय भूमि का उपयोग करके भी परिक्रमा पथ का निर्माण किया जा सकता है। यदि ऐसा संभव है तो करोड़ों रुपये खर्च कर निजी जमीन खरीदने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

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प्रभावित किसान फ़हीम अख्तर का आरोप है कि कहीं यह पूरा मामला कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने और जमीनों का मूल्य बढ़ाने की रणनीति तो नहीं है। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन किसानों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर दी है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि परियोजना का रूट आखिर किन तकनीकी मानकों के आधार पर तय किया गया? क्या भूगोल, पर्यावरण और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर यह मार्ग चुना गया है, या फिर इसके पीछे कोई और कारण हैं? इन सवालों का जवाब देने के लिए अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आया है।

प्रशासनिक चुप्पी ने विवाद को और बढ़ा दिया है। किसानों का कहना है कि यदि परियोजना पूरी तरह पारदर्शी है तो रूट मैप, तकनीकी रिपोर्ट, सर्वे दस्तावेज और भूमि चयन के आधार सार्वजनिक किए जाने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होने से संदेह लगातार गहराता जा रहा है।


PunjabKesariकिसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों पर निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई और दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए तो वे न्यायालय की शरण लेंगे। प्रभावित भू-स्वामियों का कहना है कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन विकास के नाम पर पारदर्शिता से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अब यह मामला केवल एक सड़क या परिक्रमा पथ निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास की परीक्षा बन गया है। डोंगरगढ़ जैसे धार्मिक नगर में विकास परियोजनाओं को लेकर उठ रहे सवालों का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो विवाद और गहरा सकता है।

परिक्रमा पथ परियोजना धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दे सकती है, लेकिन उससे पहले प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि निजी भूमि खरीद की आवश्यकता क्यों है, मार्ग चयन का आधार क्या है और किसानों की आपत्तियों का समाधान कैसे किया जाएगा। क्योंकि विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब वह पारदर्शी, न्यायसंगत और जनहितकारी हो। फिलहाल डोंगरगढ़ में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह केवल परिक्रमा पथ है या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है?

 

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