भिंड कलेक्टर की संवेदनहीनता उजागर! हाथ जोड़े फरियाद करती रह गई महिला, साहब अनदेखा करके चलते बने

Edited By meena, Updated: 31 Jan, 2026 12:41 PM

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भिंड जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना पर पीड़ित महिला की फरियाद को अनदेखा करने का गंभीर आरोप लगा है...

भिंड : भिंड जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना पर पीड़ित महिला की फरियाद को अनदेखा करने का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि महिला अपनी समस्या लेकर कलेक्टर के पास पहुंची थी, लेकिन बिना उसकी बात सुने ही कलेक्टर गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।

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मीडियाकर्मियों को देख महिला ने सुनाई अपनी आपबीती सुनाई। वही मीडिया को वीडियो बनाते देख कलेक्टर किरोड़ीलाला मीना भड़क उठे और कहा- आप लोग कौन।महिला अपनी बेटी की सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए पिछले कुछ माह से दफ्तर-दफ्तर भटक रही थी लेकिन कहीं सुनवाई नही हो रही थी। बताया जा रहा है कि महिला पहले जिला अस्पताल में सुबह 8 बजे से 2 बजे तक ड्यूटी करती है, फिर बेटी की सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सिस्टम से जद्दोजहद कर रही है।

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महिला का कहना है कि बेटी को गवर्मेंट हॉस्पिटल में सीट मिली है जिसके लिए सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट की आवश्यकता है। 4 फरवरी तक सर्टिफिकेट जमा कराना अनिवार्य है। बेटी की सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अपने प्रॉपर्टी रूपी प्लॉट के सभी वांछित दस्तावेज प्रस्तुत कर चुकी है, फिर भी तहसीलदार द्वारा सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट बनाने में टालमटोल की जा रही है। महिला ने भिंड तहसीलदार रंजीत कुशवाह पर अनावश्यक परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भिंड तहसील कार्यालय के चक्कर लगाकर वह हार चुकी है।

लगभग 3 माह से भिंड तहसीलदार कार्यालय के महिला काट रही चक्कर मगर काम नहीं हुआ। पीड़ित महिला के मुताबिक वह पिछले 1 माह से सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर कई बार तहसीलदार कार्यालय पहुंची लेकिन काम नहीं हुआ। इधर नवागत कलेक्टर किरोडीलाल मीना जनता की समस्याओं के निदान में लगातार उदासीन रवैया अपना रहे हैं, जिसका अधीनस्थ अधिकारी लाभ उठा रहे है।

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कलेक्टर द्वारा पहले लापरवाहीपूर्ण रवैया अपनाते हुए दंदरौआ मंदिर जमीन मामले में कोर्ट में अपने ही कमिश्नर के खिलाफ 'झूठा शपथ पत्र' देने पर भी न्यायाधीश G S अहलूवालिया द्वारा कड़ी फटकार लगाई जा चुकी है। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना और कलेक्टर को प्रशासनिक चेतावनी देते हुए, इस आदेश की प्रति उनकी सेवा पुस्तिका (CR) में दर्ज करने का निर्देश भी दिया है।

मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर कलेक्टर ने कोई स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए दूरी बना ली और मौके से निकल गए। कलेक्टर का यह रवैया न सिर्फ पीड़ित महिला के प्रति असंवेदनशील माना जा रहा है, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

अब यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जब एक पीड़ित महिला की फरियाद को इस तरह अनदेखा किया जाएगा, तो आम जनता को न्याय की उम्मीद कैसे होगी। वहीं, मीडिया से दूरी बनाने की घटना ने प्रशासन और प्रेस के रिश्तों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

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