सिवनी शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: 10वीं में 18वां और 12वीं में और भी खराब प्रदर्शन, जिम्मेदार कौन?

Edited By Vandana Khosla, Updated: 21 Apr, 2026 11:28 AM

big question on seoni education

लखनादौन/सिवनी (पवन डेहरिया): मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित वर्ष 2026 के परीक्षा परिणामों ने सिवनी जिले की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। आंकड़ों के अनुसार सिवनी जिला कक्षा 10वीं की मेरिट सूची में 18वें स्थान पर...

लखनादौन/सिवनी (पवन डेहरिया): मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित वर्ष 2026 के परीक्षा परिणामों ने सिवनी जिले की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। आंकड़ों के अनुसार सिवनी जिला कक्षा 10वीं की मेरिट सूची में 18वें स्थान पर रहा, जबकि कक्षा 12वीं में और भी खराब प्रदर्शन करते हुए 20वें स्थान पर खिसक गया। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जिले का यह गिरता प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ है, बल्कि लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में चली आ रही लापरवाही और अनदेखी का परिणाम है। यदि समय रहते शिक्षा विभाग ने उचित कदम उठाए होते, तो सिवनी जैसे जिले को इतनी खराब रैंकिंग का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की।

जमीनी हकीकत: स्कूलों में व्यवस्था चरमराई
सिवनी जिले के अधिकांश ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में स्कूलों की स्थिति आज भी संतोषजनक नहीं है। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, तो कहीं शिक्षकों की नियमित उपस्थिति ही सवालों के घेरे में है। छात्रों को समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही, जिससे उनकी तैयारी कमजोर रह जाती है। कुछ स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव देखा गया है। लाइब्रेरी, प्रयोगशाला और डिजिटल संसाधनों की कमी छात्रों के समग्र विकास में बाधा बन रही है। जब आधारभूत सुविधाएं ही कमजोर हों, तो बेहतर परिणाम की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है।

शिक्षा विभाग की लापरवाही बनी बड़ी वजह
जिले के शिक्षा विभाग पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि वह स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग और मूल्यांकन में पूरी तरह विफल रहा है। निरीक्षण की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित रह जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई खास सुधार देखने को नहीं मिलता। शिक्षकों की जवाबदेही तय करने में भी विभाग नाकाम रहता है। कई मामलों में यह देखा गया है कि शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते ना पढ़ाई में अपेक्षित गंभीरता भी नहीं दिखाते, लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ता है।

छात्रों पर बढ़ता दबाव, लेकिन सहयोग नहीं
एक तरफ छात्रों पर अच्छे अंक लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें पर्याप्त मार्गदर्शन और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। कोचिंग की सुविधा हर छात्र को उपलब्ध नहीं होती, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए यह और भी मुश्किल है। ऐसे में स्कूल ही छात्रों के लिए मुख्य सहारा होते हैं, लेकिन जब वहीं व्यवस्था कमजोर हो, तो छात्र पिछड़ जाते हैं। यह स्थिति सिवनी जिले में साफ तौर पर देखने को मिल रही है।

अन्य जिलों से पीछे रहना बना चिंता का विषय
मध्यप्रदेश के कई जिले शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सिवनी जिला पिछड़ता जा रहा है। यह केवल रैंकिंग का मामला नहीं है, बल्कि जिले के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। जब अन्य जिले शिक्षा में आगे बढ़ रहे हैं, तो सिवनी का पीछे रहना यह दर्शाता है कि यहां की व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है। यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है।

अभिभावकों और समाज में नाराजगी
जिले के इस खराब प्रदर्शन से अभिभावकों और आम नागरिकों में नाराजगी का माहौल है। लोगों का आरोप है कि उनके बच्चों ने मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन सिस्टम की कमजोरियों के कारण उन्हें बेहतर परिणाम नहीं मिल पाए। कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग केवल औपचारिकताओं में उलझा रहता है और जमीनी समस्याओं को नजरअंदाज करता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

सुधार की जरूरत, लेकिन कब होगी शुरुआत?
विशेषज्ञों का मानना है कि सिवनी जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी होगी और शिक्षकों की जवाबदेही तय करनी होगी। इसके अलावा छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन, अतिरिक्त कक्षाएं और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि वहां के छात्र भी समान अवसर प्राप्त कर सकें।

जिम्मेदारी तय करना होगा जरूरी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या केवल छात्र और शिक्षक ही इसके लिए जिम्मेदार हैं, या फिर शिक्षा विभाग को भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी? जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सुधार की उम्मीद करना बेकार है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।

अब भी नहीं चेते तो और बिगड़ेगी स्थिति
सिवनी जिले का यह परिणाम एक चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यदि शिक्षा विभाग अब भी नहीं जागा और सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो सकती है। जिले के छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और इसे सुरक्षित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि क्या शिक्षा विभाग इस चुनौती को गंभीरता से लेता है या फिर हर साल इसी तरह निराशाजनक परिणाम सामने आते रहेंगे।

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