Edited By Himansh sharma, Updated: 29 Jan, 2026 07:10 PM

गांव पहुंचकर कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। ग्रामीणों ने तुलारगुफा तक सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की मांग रखी।
बीजापुर: आजादी के 78 वर्षों बाद पहली बार छत्तीसगढ़ के दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र के गांवों तक प्रशासन सीधे पहुंचा। बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा ने जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे और प्रशासनिक टीम के साथ ऐसा कदम उठाया, जिसने न सिर्फ इतिहास रचा बल्कि विकास की नई उम्मीद भी जगा दी। गुरुवार को प्रशासनिक टीम अबूझमाड़ क्षेत्र के तुलारगुफा और मंगनार गांव पहुंची। यह सफर आसान नहीं था..जहां तक रास्ता था वहां तक बाइक से और उसके बाद 5 से 7 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय कर टीम गांव तक पहुंची। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब कोई कलेक्टर खुद इन गांवों तक पहुंचा हो।
पहाड़, जंगल और नाले पार कर गांव तक पहुंचे अफसर
घने जंगल, पहाड़ी रास्ते, उबड़-खाबड़ जमीन और नदी-नालों को पार करते हुए प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। इस दौरान भैरमगढ़ थाने के जवान, एसडीएम, जनपद सीईओ, जनप्रतिनिधि और सरपंच भी साथ मौजूद रहे। कई स्थानों पर आज भी नक्सलियों के पुराने स्मारक दिखे, जो इस इलाके के बीते खौफनाक दौर की याद दिलाते हैं।
ग्रामीणों से सीधा संवाद, सड़क की मांग पर गंभीर पहल
गांव पहुंचकर कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। ग्रामीणों ने तुलारगुफा तक सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की मांग रखी। कलेक्टर संबित मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि सड़क निर्माण सहित सभी जायज मांगों पर प्राथमिकता से काम होगा। अफसरों की मौजूदगी से ग्रामीणों में उत्साह और भरोसा साफ नजर आया।
धार्मिक आस्था का केंद्र है तुलारगुफा
तुलारगुफा सिर्फ दुर्गम इलाका नहीं, बल्कि आस्था का बड़ा केंद्र भी है। यहां प्राचीन शिवलिंग मौजूद है, जहां प्राकृतिक जलस्रोत से जलाभिषेक होता है। महाशिवरात्रि पर दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रशासनिक टीम ने गांव पहुंचकर शिवलिंग के दर्शन भी किए।
नक्सल विरोधी अभियानों का दिखा असर
बीते एक साल में सुरक्षाबलों के सघन नक्सल विरोधी अभियानों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। नक्सलियों का नेटवर्क कमजोर पड़ा है। इसी क्षेत्र में नक्सल संगठन का जनरल सेक्रेटरी बसवराजू मारा गया, जबकि कुख्यात नक्सली लीडर रूपेश ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। इन सफलताओं के बाद अब ग्रामीण डर के बिना विकास की मांग कर रहे हैं और प्रशासन खुद दुर्गम इलाकों तक पहुंच रहा है।