Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Aug, 2026 08:30 PM

चंबल नदी के उसैद घाट पर गुरुवार दोपहर स्टीमर सेवा बहाल कराने की मांग को लेकर चल रहा विरोध अचानक गंभीर स्थिति में पहुंच गया।
मुरैना। चंबल नदी के उसैद घाट पर गुरुवार दोपहर स्टीमर सेवा बहाल कराने की मांग को लेकर चल रहा विरोध अचानक गंभीर स्थिति में पहुंच गया। कांग्रेस के महुआ ब्लॉक अध्यक्ष शेर सिंह तोमर ने कथित तौर पर नदी में छलांग लगा दी। नेता के नदी में उतरते ही घाट पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से उन्हें समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बताया जा रहा है कि तोमर पिछले दो दिनों से उसैद-पिनाहट के बीच बंद पड़ी स्टीमर सेवा शुरू कराने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि राखी के पर्व के चलते चंबल के दोनों तरफ लोगों की आवाजाही काफी बढ़ गई है और स्टीमर बंद होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
चार किलोमीटर की दूरी के लिए 150 किलोमीटर तक का सफर
उसैद और पिनाहट के बीच चंबल नदी का रास्ता करीब चार किलोमीटर का है। स्टीमर सेवा बंद होने के बाद लोगों को सड़क मार्ग से लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस वजह से करीब 140 से 160 किलोमीटर तक अतिरिक्त सफर करना पड़ता है। कांग्रेस नेता का कहना है कि इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। खासकर त्योहार के समय यात्रियों की संख्या बढ़ने से समस्या और गंभीर हो गई है।
पुराने हादसे के बाद बंद हुई स्टीमर सेवा
स्टीमर संचालन पर रोक की वजह 16 अगस्त को हुई एक घटना बताई जा रही है। उस दिन नगरा घाट से उत्तर प्रदेश के कैंजरा घाट की ओर जा रहा यात्रियों से भरा स्टीमर चंबल की तेज धारा की चपेट में आकर बह गया था। स्टीमर कई घंटे तक नदी में बहता रहा और उसमें सवार 64 यात्रियों की जान जोखिम में पड़ गई थी। घटना के बाद पुलिस ने नगरा घाट के स्टीमर को जब्त कर लिया था। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए उसैद-पिनाहट के बीच चलने वाली सेवा पर भी रोक लगा दी गई।
विरोध के बीच नदी में छलांग से मचा हड़कंप
गुरुवार को स्टीमर शुरू कराने की मांग को लेकर तोमर उसैद घाट पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने नदी में छलांग लगा दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गोताखोरों को नदी में उतारा और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटना के बाद घाट पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। फिलहाल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि यात्रियों की सुविधा और नदी में सुरक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए स्टीमर सेवा को लेकर क्या फैसला लिया जाए। प्रशासन की ओर से स्टीमर संचालन की अनुमति सुरक्षा मानकों और नदी की मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा के बाद ही दिए जाने की बात कही जा रही है।