Edited By Desh Raj, Updated: 21 Apr, 2026 03:55 PM

बुरहानपुर जिले के नेपानगर स्थित संजय नगर इन दिनों भय और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा जारी नोटिस ने यहां रहने वाले 240 से अधिक मकानों पर संकट खड़ा कर दिया है।
बुरहानपुर (राजवीर सिंह): बुरहानपुर जिले के नेपानगर स्थित संजय नगर इन दिनों भय और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा जारी नोटिस ने यहां रहने वाले 240 से अधिक मकानों पर संकट खड़ा कर दिया है। रेलवे लाइन विस्तार के नाम पर दी गई इस चेतावनी ने करीब 250 परिवारों के सिर से छत छिनने का खतरा पैदा कर दिया है।
30 दिन के भीतर मकान खाली करने के आदेश के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। वर्षों से इस जमीन पर बसे लोग अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। यह सिर्फ मकानों का मामला नहीं, बल्कि उन जिंदगियों का सवाल है जो पीढ़ियों से यहां रहकर अपना आशियाना बना चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों का सहारा और रोजमर्रा की जिंदगी — सब कुछ इस फैसले से प्रभावित हो रहा है।
रेलवे प्रशासन के इस कदम के खिलाफ लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है। नेपानगर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पाटिल, कांग्रेस जिला अध्यक्ष रिंकू टॉक, पूर्व प्रदेश महासचिव अजय रघुवंशी और ग्रामीण अध्यक्ष रविंद्र महाजन सहित बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां कलेक्टर हर्ष सिंह को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट मांग रखी गई कि बिना पुनर्वास के कोई कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर विस्थापन नहीं सहेंगे। रहवासी रजिया ने कहा, “हमें जमीन के बदले जमीन दी जाए।” वहीं वार्ड निवासी तायडे ने सवाल उठाया, “हम वर्षों से यहां रह रहे हैं, अब हमें बेघर किया जा रहा है, हम कहां जाएंगे?”
अगर प्रशासन ने समय रहते उचित समाधान नहीं निकाला, तो नेपानगर में यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या विकास की रफ्तार अब इतनी बेरहम हो गई है कि इंसानों की बस्तियां उसे बोझ लगने लगी हैं?