धमधा में पपीता किसानों पर टूटा संकट, व्यापारी न पहुंचने से पेड़ पर ही सड़ गई फसल, बड़ा घाटा

Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Jun, 2026 02:16 PM

dhamdha papaya farmers face massive loss amid transport crisis

युद्ध और उससे पैदा हुई आपूर्ति संबंधी समस्याओं का असर अब गांवों और खेतों तक भी दिखाई देने लगा है।

धमधा, दुर्ग (हेमंत पाल): युद्ध और उससे पैदा हुई आपूर्ति संबंधी समस्याओं का असर अब गांवों और खेतों तक भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक में पपीता किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। सब्जी और फल उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र से उत्पाद देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों तक भेजे जाते हैं, लेकिन हाल के दिनों में डीजल संकट और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से बाहरी व्यापारियों का आना लगभग बंद हो गया।

व्यापारियों के नहीं पहुंचने से खेतों में तैयार पपीते की समय पर खरीदी नहीं हो सकी। नतीजतन बड़ी मात्रा में पपीता पेड़ों पर ही पक गया। अधिक पकने के कारण फलों की गुणवत्ता प्रभावित हुई और बाजार में उनकी मांग तथा कीमत दोनों घट गईं। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

PunjabKesariस्थानीय किसान जालम सिंह पटेल ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ पपीते की खेती की थी, लेकिन व्यापारियों के नहीं आने और फसल की बिक्री नहीं होने से उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर गया। उन्होंने कहा कि कई किसान खेती के लिए कर्ज लेकर निवेश करते हैं, ऐसे में फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से वे आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

धमधा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही परिवहन और विपणन व्यवस्था सामान्य नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित किसानों को राहत पैकेज, उचित मुआवजा और फसलों के विपणन की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को संभाला जा सके।

किसानों का दर्द:

फसल तैयार थी, व्यापारी नहीं पहुंचे। पपीता पेड़ पर ही पक गया और अब उसकी कीमत आधी से भी कम मिल रही है। लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। - जालम सिंह पटेल, किसान

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