Edited By meena, Updated: 11 Apr, 2026 06:13 PM

नगर निगम के बजट सत्र में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। मामला अब केवल राष्ट्रवाद बनाम धार्मिक भावना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक रणनीति और...
इंदौर : नगर निगम के बजट सत्र में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। मामला अब केवल राष्ट्रवाद बनाम धार्मिक भावना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक रणनीति और अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
कांग्रेस में अंदरूनी कलह आई सामने
इस विवाद के बीच कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने अपनी ही पार्टी की पार्षद फौजिया शेख अलीम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बीच ‘डील’ होने का गंभीर आरोप लगाया है। भदौरिया का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित था और इसके पीछे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी भी एक बड़ा कारण है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है।
पुरानी रंजिश बनी विवाद की जड़
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विवाद के पीछे शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और फौजिया शेख अलीम के बीच पुराना मनमुटाव बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं, जो अब सार्वजनिक विवाद का रूप ले चुके हैं। भदौरिया, जो चौकसे के समर्थक माने जाते हैं, उन्होंने भी इस मामले में खुलकर आरोप लगाए हैं।
फौजिया शेख के रुख पर उठे सवाल
राजू भदौरिया ने कहा कि फौजिया शेख अलीम पहले नेता प्रतिपक्ष रह चुकी हैं और कई बार परिषद में ‘वंदे मातरम्’ गा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार उनका बैठक में लगभग एक घंटे देरी से पहुंचना और विवादित बयान देना कई सवाल खड़े करता है। भदौरिया के मुताबिक, पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने केवल उनसे पूछा था कि क्या वे ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाना चाहतीं, जिस पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी।
बजट बहस से ध्यान भटकाने का आरोप
भदौरिया ने यह भी आरोप लगाया कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जानबूझकर इस विवाद को बढ़ने दिया, ताकि बजट पर गंभीर चर्चा न हो सके। उनका कहना है कि अगर बजट पर बहस होती, तो शहर के कई महत्वपूर्ण मुद्दों—खासकर भागीरथपुरा क्षेत्र से जुड़े विषय उठाए जाते और महापौर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो सकते थे।
सियासी तापमान बढ़ा, आगे क्या?
इस पूरे घटनाक्रम ने इंदौर की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद संगठनात्मक कार्रवाई तक पहुंचता है या फिर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहता है। फिलहाल, ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें राष्ट्रवाद, धर्म और आंतरिक राजनीति तीनों पहलू एक साथ नजर आ रहे हैं।