डोंगरगढ़ नवरात्र में गैस संकट! 100 सिलेंडर मंजूर, एक भी नहीं मिला, चूल्हे पर चल रहा 10 लाख श्रद्धालुओं का इंतजाम

Edited By Himansh sharma, Updated: 19 Mar, 2026 07:59 PM

dongargarh navratri gas crisis 100 cylinders approved supply zero

चैत्र नवरात्र जैसे विशाल आयोजन के बीच कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत ने व्यवस्थाओं की असल तस्वीर उजागर कर दी है।

डोंगरगढ़: चैत्र नवरात्र जैसे विशाल आयोजन के बीच कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत ने व्यवस्थाओं की असल तस्वीर उजागर कर दी है। प्रशासन ने मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट को 100 सिलिंडरों की आपूर्ति की अनुमति तो दे दी, लेकिन बुधवार शाम तक ट्रस्ट को एक भी सिलिंडर नहीं मिल पाया। हालात ऐसे बन गए हैं कि ट्रस्ट को श्रद्धालुओं और कर्मचारियों के लिए चूल्हे पर ही भोजन तैयार करने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के मुताबिक, समय पर गैस उपलब्ध होती तो व्यवस्थाएं सुचारु रहतीं, लेकिन फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।

PunjabKesari

सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। डोंगरगढ़ स्थित मंदिर में ट्रस्ट ने चूल्हों पर भोजन बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। कठिन परिस्थितियों के बीच ट्रस्ट ने नौ दिनों के लिए सौ सिलिंडरों की मांग की थी। खाद्य विभाग का दावा है कि मंगलवार को ही समस्या सुलझा ली गई और प्रशासन ने आपूर्ति की अनुमति दे दी है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह आदेश अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। नवरात्र के दौरान मेले की विशेष व्यवस्थाओं में ट्रस्ट को लगभग 2500 कर्मचारियों और पुलिस जवानों के लिए भोजन तैयार करना होता है। पिछले चैत्र नवरात्र में यहां 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। ऐसे में सिलिंडर न मिलने की स्थिति में इतनी बड़ी संख्या के लिए भोजन व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इसके साथ ही पुलिस और सुरक्षा बलों की मेस के लिए भी गैस आपूर्ति पर संशय बना हुआ है। हालांकि प्रशासन की ओर से आपूर्ति में कमी नहीं होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक इसकी ठोस स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। एहतियात के तौर पर पुलिस प्रशासन ने भी चूल्हे पर भोजन बनाने की तैयारी कर ली है।

इस संकट का असर सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि डोंगरगढ़ के होटल-रेस्टोरेंट और अस्थायी दुकानों तक साफ दिखाई दे रहा है। धर्मनगरी के छोटे-बड़े कारोबारी अब गैस के बजाय जलाऊ लकड़ी के भरोसे हैं। कमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति लगभग ठप है और नए निर्देशों के अनुसार होटल-रेस्टोरेंट को सिर्फ 20 प्रतिशत गैस ही मिल पाएगी, जो बढ़ती भीड़ के बीच दो दिन भी नहीं चल पा रही है। यही वजह है कि कई व्यापारियों ने लकड़ी का भंडारण शुरू कर दिया है। मेला ग्राउंड में दुकान लगाने वाले राधे मोहन कन्नौजिया ने बताया कि गैस नहीं मिलने पर उन्हें 17 हजार रुपये में ट्रैक्टर भर लकड़ी खरीदनी पड़ी। शिवम रेस्टोरेंट सहित कई जगहों पर अब चूल्हे पर ही भोजन बनाकर परोसा जा रहा है। मेले में लगने वाली करीब दो सौ अस्थायी दुकानों के सामने भी यही स्थिति है। इनमें से अधिकतर होटल और खानपान से जुड़े व्यवसाय हैं, जिनका संचालन अब पूरी तरह चूल्हों पर निर्भर हो गया है।

PunjabKesariइसके अलावा पदयात्रियों के लिए अंजोरा से डोंगरगढ़ तक लगाए जाने वाले सेवा पंडाल और विभिन्न स्थानों पर होने वाले भंडारों पर भी इस संकट का सीधा असर पड़ रहा है। हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार करने वाली समितियां अब वैकल्पिक इंतजाम में जुटी हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उन्हें परेशान कर रही है। कमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर लागू नई व्यवस्था के तहत व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को उनके पिछले महीने की खपत का केवल 20 प्रतिशत ही गैस मिल रही है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी होटल में पिछले महीने 20 सिलिंडरों की खपत हुई थी, तो इस बार उसे मात्र चार सिलिंडर ही दिए जाएंगे। वहीं अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, जेल और रेलवे स्टेशन जैसी आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए बिना कटौती के आपूर्ति का प्रावधान रखा गया है, जबकि सरकारी कार्यालयों और कैंटीन को 50 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही कमर्शियल की जगह घरेलू सिलिंडर के उपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

बुधवार को दोपहर तीन बजे खाद्य विभाग की वीडियो कॉन्फ्रेंस में इस नई व्यवस्था की जानकारी दी गई और एक घंटे के भीतर एजेंसियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। यह स्थिति प्रशासनिक दावों और वास्तविकता के बीच की खाई को साफ तौर पर दिखाती है।हालांकि खाद्य विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस कनेक्शनों पर किसी तरह का संकट नहीं है और शहरी क्षेत्रों में 25 दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर सिलिंडरों की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। इसके बावजूद डोंगरगढ़ में नवरात्र जैसे बड़े आयोजन के दौरान कमर्शियल गैस की कमी ने व्यवस्थाओं को संकट में डाल दिया है, जहां आस्था के इस महापर्व में अब धुएं से उठती चूल्हों की लपटें प्रशासनिक तैयारी की असल तस्वीर बयान कर रही हैं।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!