Edited By meena, Updated: 12 Feb, 2026 07:44 PM

राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब भोपाल में प्रदर्शन कर रहे दामोदर यादव की मंडल पदाधिकारियों के साथ गिरफ्तारी हुई। दामोदर यादव यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में हजारों...
भोपाल (इजहार खान) : राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब भोपाल में प्रदर्शन कर रहे दामोदर यादव की मंडल पदाधिकारियों के साथ गिरफ्तारी हुई। दामोदर यादव यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में हजारों कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और इन नियमों को लागू करने की मांग कर रहे थे। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने उनपर लाठियां भांजी और वाटर केनन से हमला किया।
किस मुद्दे को लेकर किया विरोध?
UGC से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर भीम आर्मी द्वारा दोपहर 1:30 बजे जयंती मैदान (अंबेडकर मैदान) में प्रदेश स्तरीय आंदोलन एवं “CM घेराव” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में दामोदर यादव मंडल उपस्थित रहें तथा भीम आर्मी के हजारों कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। सभा के उपरांत पैदल मार्च करते हुए मुख्यमंत्री निवास की ओर प्रस्थान करना चाहा मगर पुलिस ने रोक कर जेल भेज दिया।
आर-पार की लड़ाई होगी- दामोदर यादव
गिरफ्तारी पर दामोदर यादव ने कहा कि हमें एक घंटे से घुमाया जा रहा। पता नहीं कहां लेकर जा रहे हैं। इस दौरान विधायक प्रजापति, सुनिल बैरसिया जिनके आह्वान से भीम आर्मी ने आंदोलन किया है। इस दौरान पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता भी गिरफ्तारी में शामिल रहे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मोहन यादव जी, आर पार की लड़ाई लड़ेंगे। चाहे हमें जेल जाना पड़े, चाहे कितनी गिरफ्तारी हो जाए। हम लड़ेंगे और हल हाल में यूजीसी बिल लागू करवा कर रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी गिरफ्तारी के विरोध में प्रदेश से लेकर देभभर में चंद्र शेखर तिवारी के नेतृत्व में आंदोलन होगा। इसके लिए तैयार रहना।

प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी
विरोध प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपने की कोशिश की गई लेकिन इस दौरान तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन ने वाटर कैनन किया और दामोदर यादव सहित अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस दौरान हंगामें की स्थिति निर्मित हुई और जमकर नारेबाजी हुई।
आगे की रणनीति पर नजर
गिरफ्तारी के बाद समर्थकों में उत्साह और नाराजगी दोनों देखी जा रही है। संगठन की ओर से संकेत मिले हैं कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। अब सबकी नजर प्रशासन और संगठन के अगले कदम पर टिकी है।