Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Jan, 2026 11:58 AM
खंडवा। (मुश्ताक मंसूरी): मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक जमीन विवाद उस वक्त सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया, जब एक युवक अपनी फरियाद लेकर सीधे हाईटेंशन लाइन के टॉवर पर चढ़ गया। यह घटना खंडवा से सटे जूनापानी क्षेत्र की है, जहां जमीन को लेकर उपजा विवाद प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
टॉवर पर चढ़कर युवक ने जताया विरोध
जूनापानी निवासी पिंटू पाल नामक युवक का आरोप है कि उसकी करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि पर खंडवा के पूर्व विधायक देवेंद्र वर्मा जबरन कब्जा करने पहुंचे। पिंटू पाल का कहना है कि उसने कई बार प्रशासन और राजस्व विभाग से शिकायत की, लेकिन प्रभावशाली नेता के दबाव के चलते उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी हताशा और आक्रोश में आकर वह हाईटेंशन लाइन के टॉवर पर चढ़ गया और अपनी जान जोखिम में डालकर विरोध दर्ज कराया।
पद और रसूख का हो रहा दुरुपयोग
युवक का सीधा आरोप है कि पूर्व विधायक अपने राजनीतिक पद और रसूख का इस्तेमाल कर एक गरीब किसान की जमीन हड़पना चाहते हैं। पिंटू पाल ने मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया से कहा,
जब कानून और प्रशासन भी प्रभावशाली लोगों के आगे बेबस हो जाए, तो आम आदमी के पास अपनी जान दांव पर लगाने के अलावा और क्या रास्ता बचता है?
पूर्व विधायक ने आरोपों को किया खारिज
वहीं इस पूरे मामले पर पूर्व विधायक देवेंद्र वर्मा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन उन्होंने पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत खरीदी है और दस्तावेजों के आधार पर ही कब्जा लेने पहुंचे थे। उन्होंने युवक द्वारा टॉवर पर चढ़ने की घटना को पहले भी अपनाया गया “दबाव बनाने का तरीका” बताया।
पहले भी कर चुका है ऐसा कृत्य
गौर करने वाली बात यह है कि पिंटू पाल इससे पहले भी इसी तरह हाईटेंशन लाइन के टॉवर पर चढ़कर विरोध दर्ज करा चुका है। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर ऐसा कौन-सा दबाव या मजबूरी है, जो एक युवक को बार-बार अपनी जान जोखिम में डालने पर मजबूर कर रही है।
मौके पर पुलिस और प्रशासन, समझाइश का दौर जारी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस लगातार युवक को समझाइश देकर सुरक्षित नीचे उतारने का प्रयास करती रही। घंटों चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।
बड़ा सवाल: क्या कानून सबके लिए बराबर है?
यह मामला सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि सत्ता, रसूख और आम नागरिक के अधिकारों के टकराव की तस्वीर पेश करता है। सवाल यह है कि क्या प्रभावशाली नेताओं के सामने कानून कमजोर पड़ रहा है? और क्या आम आदमी को न्याय पाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी?
फिलहाल पुलिस और प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने में जुटा है और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। लेकिन यह घटना सत्ता और सिस्टम पर कई गंभीर सवाल जरूर छोड़ गई है। अगर आरोप सही हैं, तो यह पद के प्रभाव के दुरुपयोग का गंभीर मामला है, और अगर आरोप गलत हैं, तो प्रशासन समय रहते स्थिति क्यों नहीं संभाल सका - यह भी एक बड़ा सवाल है।
जवाब जांच के बाद सामने आएंगे, लेकिन खंडवा की यह घटना सत्ता और सिस्टम को कटघरे में जरूर खड़ा करती है।