स्वास्थ्य योजना में करोड़ों की गड़बड़ी का खुलासा, पूर्व CMO नरेश वर्मा निलंबित

Edited By meena, Updated: 26 Feb, 2026 01:08 PM

former cmo naresh verma suspended after crores of rupees worth of irregularities

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने तत्कालीन कवर्धा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी नरेश...

खैरागढ (हेमंत पाल): मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने तत्कालीन कवर्धा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी नरेश वर्मा को निलंबित कर दिया है। वर्तमान में बेमेतरा में पदस्थ वर्मा को निलंबन अवधि में दुर्ग स्थित संयुक्त संचालक कार्यालय से अटैच किया गया है।

राज्य शहरी विकास अभिकरण द्वारा जून 2025 में की गई प्रारंभिक जांच में दवा खरीदी, वितरण और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पाई गई। जांच में लगभग 20 लाख 80 हजार 380 रुपये की वित्तीय हानि के लिए नरेश वर्मा को जिम्मेदार ठहराते हुए वसूली नोटिस जारी किया गया था।

इसके बाद विशेषज्ञ समिति द्वारा दस्तावेजों की विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालन एजेंसी पर निर्धारित अर्थदंड लागू नहीं किया गया, जिससे शासन को करीब 25 लाख 91 हजार 500 रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ। साथ ही एजेंसी को निर्धारित से अधिक भुगतान किए जाने की पुष्टि भी हुई। समिति ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और अतिरिक्त भुगतान की वसूली के साथ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की थी।

सूडा के पत्र में दवा खरीदी और वितरण में 2 लाख 13 हजार 497 रुपये के अपव्यय तथा कुल 23 लाख 8 हजार 380 रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का उल्लेख किया गया था, लेकिन इसमें से केवल 2 लाख 28 हजार रुपये की ही वसूली की गई। शेष राशि पर कार्रवाई न होने से शासन को नुकसान हुआ।

विभाग ने पूरे प्रकरण को सेवा शर्तों के उल्लंघन और वित्तीय अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। शासन को हुई वित्तीय हानि की वसूली संबंधित अधिकारी से किए जाने की बात भी स्पष्ट की गई है।

इस मामले को सार्वजनिक रूप से उठाने में खैरागढ़ जिले के पूर्व जिला भाजपा महामंत्री रामाधार रजक की भूमिका बताई जा रही है। शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया शुरू हुई और अंततः निलंबन की कार्रवाई हुई।

अब बड़ा सवाल यह है कि जांच समिति द्वारा एफआईआर की अनुशंसा के बाद क्या विभाग आपराधिक कार्रवाई भी करेगा या मामला केवल निलंबन और वसूली तक सीमित रहेगा। फिलहाल यह प्रकरण प्रशासनिक जवाबदेही और जनहितकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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