वंदे मातरम विवाद के चार दिन बाद रुबीना खान ने जताया खेद, बोली - "आक्रोश में गलत बयान दिया, मुझे अफसोस है"

Edited By Vandana Khosla, Updated: 13 Apr, 2026 09:33 AM

four days after the vande mataram controversy rubina khan expressed

इंदौरः वंदे मातरम विवाद के चार दिन बाद पार्षद रुबीना इकबाल खान ने खेद जताया है। दरअसल, पार्षद रुबीना इकबाल खान ने सदन में कांग्रेस पार्टी पर विवादित टिप्पणी  की थी। लेकिन, उनके खिलाफ कांग्रेस संगठन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पार्टी...

इंदौरः वंदे मातरम विवाद के चार दिन बाद पार्षद रुबीना इकबाल खान ने खेद जताया है। दरअसल, पार्षद रुबीना इकबाल खान ने सदन में कांग्रेस पार्टी पर विवादित टिप्पणी  की थी। लेकिन, उनके खिलाफ कांग्रेस संगठन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पार्टी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच रुबीना खान ने  
कांग्रेस पार्टी पर विवादित टिप्पणी पर खेद जताया है। बोली-"आक्रोश में गलत बयान दिया, मुझे अफसोस है"

आपको बता दें कि वंदे मातरम विवाद को लेकर भाजपा, कांग्रेस पर निशाना साध रही है और कांग्रेस नेताओं की छवि जनता के सामने देश-विरोधी के रूप में दिखाने की कोशिश कर रही है। लेकिन कांग्रेस अभी तक इस मामले में शामिल दोनों महिला पार्षदों पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है। यह मामला अभी पार्टी की अनुशासन समिति के पास है। इसी बीच, कांग्रेस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली पार्षद रुबीना इकबाल खान ने चार दिन बाद अपने बयान पर खेद जताया है। हालांकि, पार्टी उन्हें माफ करने के मूड में नहीं दिख रही है।

शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने बताया कि उन्हें पार्टी से निकालने का प्रस्ताव प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेज दिया गया है और अब अंतिम फैसला भोपाल से लिया जाएगा। इधर, रुबीना खान ने सफाई देते हुए कहा कि सदन में कुछ पार्षद जातिसूचक नारे लगा रहे थे, जिससे उन्हें गुस्सा आ गया। बाद में पत्रकारों से बात करते समय उन्होंने कांग्रेस के बारे में गलत बयान दे दिया, जिसका उन्हें अफसोस है।

रुबीना खान खजराना वार्ड की पार्षद हैं। इससे पहले भी वे पार्टी से निकाली जा चुकी हैं, क्योंकि उन्होंने बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उन्हें वापस ले लिया था। उनके पति इकबाल खान भी कांग्रेस के नेता रह चुके हैं और उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन जीत नहीं पाए। बाद में वे खजराना क्षेत्र में रहने लगे और नगर निगम चुनाव में अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाया।
 

 

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