Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Oct, 2025 11:08 AM

मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। सरकार उस नियम को बदलने जा रही है, जो 2001 से लागू था। इस नियम के तहत अगर किसी कर्मचारी की तीसरी संतान होती थी, तो उसकी नौकरी खतरे में पड़ जाती थी। लेकिन अब इस नियम को खत्म करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
कौन-कौन होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित?
इस फैसले से उन कर्मचारियों को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा, जिनकी तीसरी संतान के कारण नौकरी खतरे में थी।
खासकर मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारी।
अकेले शिक्षा विभाग में ऐसे 8,000 से 10,000 मामले हैं।
पुराने केस भी खत्म होंगे
सरकार की योजना के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होते ही तीसरी संतान से जुड़े लंबित केस अपनेआप खत्म माने जाएंगे, और इन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
लेकिन 2001 से अब तक जिन पर कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें इस फैसले का लाभ नहीं मिलेगा।
हाईकोर्ट तक जा चुका है मामला
रहमत बानो मंसूरी की कहानी इस फैसले की आवश्यकता को दर्शाती है। रहमत बानो को तीसरी संतान होने के कारण शिक्षिका पद से बर्खास्त कर दिया गया था, जबकि उनके ब्लॉक में 34 और शिक्षक ऐसे थे जिनके तीन या अधिक बच्चे थे। यह मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
मध्यप्रदेश राजस्थान-छत्तीसगढ़ के नक्शे पर
मप्र सरकार का यह कदम राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर है, जहां यह पाबंदी पहले ही हटा दी गई थी।
अगले हफ्ते या दिवाली से पहले यह प्रस्ताव कैबिनेट में पेश हो सकता है, और हजारों सरकारी परिवारों को राहत मिल सकती है।