कैलाश विजयवर्गीय विवाद में घिरे! अवकाश के बहाने सामने आया दोहरा सच

Edited By Himansh sharma, Updated: 31 Jan, 2026 11:02 AM

kailash vijayvargiya faces heat over leave controversy

मध्यप्रदेश की राजनीति में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अवकाश को लेकर उनके बयान और गतिविधियां एक-दूसरे से टकराती दिखीं, जिससे “छुट्टी पर डबल स्टैंडर्ड” का आरोप तेज हो गया है।

दरअसल, मंत्री विजयवर्गीय ने 13 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम लिखित आवेदन देकर 19 से 30 जनवरी तक पारिवारिक कारणों से अवकाश मांगा। पत्र में साफ लिखा गया कि इस अवधि में वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे।

लेकिन 20 जनवरी को उनके निज सचिव अभिमन्यु सिंह चौहान ने जनता को अलग जानकारी दी—कहा गया कि पारिवारिक मित्र के घर गमी के कारण मंत्री ने अपने सभी आगामी कार्यक्रम निरस्त कर दिए हैं। यहीं से सवाल खड़े हुए, क्योंकि अवकाश अवधि के दौरान मंत्री विजयवर्गीय लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में नजर आए।

पहले अशोकनगर में स्पॉट हुए, फिर राजधानी भोपाल में RSS के समिधा कार्यालय पहुंचे, खरगोन में मुनिश्री के आश्रम में संतों से भेंट की तस्वीरें खुद सोशल मीडिया पर साझा कीं।

इतना ही नहीं, तय अवकाश से पहले ही मंत्री इंदौर लौट आए। गुरुवार को उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष के साथ एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर बैठक की, जिसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभागायुक्त सुदाम खाडे, कलेक्टर शिवम वर्मा समेत अधिकारी मौजूद रहे।

सबसे बड़ा सवाल—चुनौती के वक्त छुट्टी क्यों?

जिस समय मंत्री अवकाश पर थे, उसी दौरान: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से मौतों का मामला सामने आया, धार की भोजशाला में बसंत पंचमी (23 जनवरी) को पूजा-नमाज को लेकर तनाव था (हालांकि सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था में मामला शांत रहा), मंत्री विजयवर्गीय धार और सतना—दोनों जिलों के प्रभारी हैं और 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज फहराने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी।

इन तमाम जिम्मेदारियों और संवेदनशील हालात के बीच छुट्टी, और फिर छुट्टी में सार्वजनिक मौजूदगी—यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं: क्या अवकाश के नाम पर जनता और मुख्यमंत्री को अलग-अलग कहानी सुनाई गई? राजनीतिक गलियारों में यह मामला विश्वसनीयता और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार और मंत्री की ओर से स्पष्टीकरण अहम होगा।

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