मीनाक्षी नटराजन विवाद में बड़ा खुलासा! फॉर्म भरने वाले वकील ने तोड़ी चुप्पी, खोले चौंकाने वाले राज, सियासी हलचल तेज

Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Jun, 2026 02:40 PM

lawyer breaks silence in meenakshi natarajan nomination row

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है।

भोपाल। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे विवाद के केंद्र में आए नामांकन फॉर्म तैयार करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता जेपी धनोपिया ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। लगातार लग रहे आरोपों के बीच उन्होंने दावा किया कि नामांकन पत्र में किसी प्रकार की तकनीकी या कानूनी गलती नहीं हुई थी और जिस आधार पर नामांकन खारिज किया गया, वह वास्तव में कोई आपराधिक मामला था ही नहीं। 23 वर्षों से चुनावी नामांकन प्रक्रिया से जुड़े धनोपिया ने कहा कि संबंधित नोटिस को आपराधिक प्रकरण बताना पूरी तरह भ्रामक है। उनके अनुसार यह केवल एक शिकायत के आधार पर जारी नोटिस था, जिसमें न तो कोई केस नंबर दर्ज था और न ही उसे जारी करने वाला व्यक्ति विधिवत अधिकृत था। ऐसे में उसे आपराधिक प्रकरण मानकर शपथ पत्र में दर्शाने की बाध्यता नहीं बनती थी।

धनोपिया ने आरोप लगाया कि जब भाजपा को यह एहसास हुआ कि कांग्रेस के विधायक अब उनके प्रभाव से बाहर हैं, तब सुनियोजित तरीके से नामांकन निरस्त कराने की रणनीति बनाई गई। उन्होंने कहा कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान ऐसी परिस्थितियां निर्मित की गईं जिससे कांग्रेस पक्ष को अपनी बात रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका।

उनका दावा है कि निर्वाचन अधिकारी से समय मांगकर स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित नोटिस के संबंध में अपना पक्ष रखने का प्रयास किया गया था। यहां तक कि कोर्ट से प्रमाणित दस्तावेज लाने के लिए भी अतिरिक्त समय की मांग की गई, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। धनोपिया ने आरोप लगाया कि उस समय कई वरिष्ठ भाजपा नेता और मंत्री वहां मौजूद थे, जिससे पूरी प्रक्रिया पर राजनीतिक दबाव की आशंका पैदा होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि नामांकन जमा करते समय निर्वाचन अधिकारी ने सभी दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच की थी और किसी प्रकार की कमी नहीं बताई गई थी। चेकलिस्ट में भी सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्ण पाए गए थे। इसके बावजूद बाद में अचानक आपत्ति उठाकर नामांकन निरस्त कर दिया गया।

धनोपिया के अनुसार, नामांकन जमा होने के बाद दोपहर में एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज भाजपा की ओर से आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे। वहीं से पूरे विवाद ने नया मोड़ लिया। उनका आरोप है कि कांग्रेस के पक्ष को सुने बिना और पर्याप्त अवसर दिए बिना निर्णय लिया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि विवादित नोटिस का उल्लेख शपथ पत्र में कर दिया जाता तो शायद इतना बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता। लेकिन उनका स्पष्ट कहना है कि कानूनन उसे आपराधिक प्रकरण मानने का कोई आधार नहीं था।

इधर कांग्रेस ने इस मामले को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी जल्द ही हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकती है। साथ ही प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक विरोध प्रदर्शन की रणनीति भी बनाई जा रही है। ऐसे में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है।

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