Edited By Desh Raj, Updated: 23 Apr, 2026 06:17 PM

मध्य प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। इस फैसले के उनके चेहरे पर खुशी आनी तय है।दरअसल लंबे समय से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे संविदा कर्मचारियों को हाईकोर्ट ने बड़ा तोहफा दिया है।
(जबलपुर):मध्य प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। इस फैसले के उनके चेहरे पर खुशी आनी तय है।दरअसल लंबे समय से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे संविदा कर्मचारियों को हाईकोर्ट ने बड़ा तोहफा दिया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ हो गया है। कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में मप्र हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी है।
दरअसल कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील पर स्थगन देने से इनकार कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा संविदा कर्मियों के पक्ष में दिए गए निर्णय को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने बेहद साफ शब्दों में कहा कि यह बड़े वर्ग के भविष्य से जुड़ा मसला है, इसलिए इस पर स्थगन नहीं दिया जाएगा। अब संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने का हाईकोर्ट द्वारा दिया गया आदेश प्रभावी बना रहेगा। दरअसल हाईकोर्ट ने सरकार के 10 साल की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए ये फैसला सुनाया है। उम्मीद की जा रही है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार जल्द ही आदेश भी जारी कर सकती है।
संविदा कर्मचारियों के लिए माना जा रहा बड़ा फैसला
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस अहम मामले में सुनवाई की है। डिवीजन बैंच ने कहा कि “यह बड़े वर्ग के भविष्य से जुड़ा मामला है, इसलिए एकलपीठ के आदेश पर स्थगन नहीं दिया जाएगा।” इसलिए सरकार को सिंगल बेंच के निर्णय का पालन करने के निर्देश दिए हैं। सिंगल बेंच ने 9 अप्रैल को पारित आदेश में निर्देश जारी किये थे। इनके मुताबिक 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए।
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार “जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को नियमित किया गया और उन्हें वेतनमान, भत्ते व वार्षिक वेतन वृद्धि दी गई, उसी प्रकार यह लाभ संविदा कर्मियों को भी प्रदान किया जाए।” आपको बता दें कि ये मामला 2009 में संविदा पर नियुक्त उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जो करीब 16 साल से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। आज तक इनको स्थायी कर्मचारियों जैसे लाभ नहीं मिले हैं। लिहाजा अब हाई कोर्ट के इस आदेश का असर मध्य प्रदेश के करीब 5 लाख संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ेगा।