Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Jun, 2026 02:53 PM

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक और कानूनी विवाद बन गया है।
भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक विवाद बन गया है। कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सीधे भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं और वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों से युक्त 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
बैठक के बाद कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जिस आधार पर खारिज किया गया, उसका चुनावी कानून में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस मामले का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया, उसमें न तो अदालत ने संज्ञान लिया है और न ही आरोप तय हुए हैं। ऐसे में उसे लंबित आपराधिक मामला मानना कानून की मूल भावना के विपरीत है।
सिंघवी ने स्पष्ट किया कि चुनावी नियमों के अनुसार उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो और जिनमें अदालत आरोप तय कर चुकी हो। मीनाक्षी नटराजन के मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी। इसलिए नामांकन निरस्त करना न केवल कानूनी रूप से कमजोर निर्णय है, बल्कि इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के समक्ष यह भी तर्क रखा कि यदि ऐसी प्रारंभिक कानूनी प्रक्रियाओं को आधार बनाकर उम्मीदवारों के नामांकन खारिज किए जाने लगे, तो लोकतांत्रिक चुनावों में समान अवसर की अवधारणा प्रभावित होगी। पार्टी ने आयोग को पूर्व के हरियाणा और गुजरात के उदाहरणों की याद दिलाते हुए कहा कि आयोग के पास रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को पलटने का अधिकार है।
इधर, भोपाल में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास रखकर विरोध दर्ज कराया, जबकि दिल्ली में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार आयोग पर निर्णय की समीक्षा का दबाव बना रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के मुताबिक चुनाव आयोग ने मामले में दो घंटे के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। आयोग का फैसला न केवल मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी, बल्कि राज्यसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी प्रभावित कर सकता है।