मीनाक्षी नटराजन विवाद ने पकड़ा तूल, चुनाव आयोग से भिड़ेगी कांग्रेस, आर-पार' का ऐलान

Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Jun, 2026 11:55 AM

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मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव गहराता जा रहा है।

भोपाल। मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव गहराता जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ पार्टी ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल भोपाल और दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर इस फैसले के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। कांग्रेस का आरोप है कि नामांकन निरस्त करने की पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता और पारदर्शिता के मानकों पर खरी नहीं उतरती। पार्टी नेताओं का कहना है कि जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी नियमों की भावना के विपरीत है।

भोपाल और दिल्ली में एक साथ दबाव की रणनीति

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस विधायकों का प्रतिनिधिमंडल सुबह 11 बजे भोपाल स्थित निर्वाचन आयोग कार्यालय पहुंचेगा, जहां अधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा। वहीं, दोपहर 12 बजे दिल्ली में पार्टी का वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखेगा और मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करेगा।

देर रात तक चला विरोध

मंगलवार रात नामांकन निरस्त होने की खबर सामने आते ही कांग्रेस नेताओं और विधायकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। भोपाल और दिल्ली में निर्वाचन आयोग कार्यालयों के बाहर पार्टी नेताओं ने देर रात तक धरना दिया और फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताया। नेताओं का कहना है कि उन्हें आयोग के अधिकारियों से तत्काल मुलाकात का समय नहीं मिला, जिससे असंतोष और बढ़ गया।

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

कांग्रेस इस मामले को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक मुद्दा मान रही है। पार्टी के कानूनी विशेषज्ञों ने भी मामले का अध्ययन शुरू कर दिया है और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि यदि चुनाव आयोग स्तर पर संतोषजनक समाधान नहीं मिला तो न्यायिक विकल्प अपनाया जाएगा।

बढ़ा राजनीतिक तापमान

राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आए इस विवाद ने प्रदेश की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बता रही है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आज भोपाल और दिल्ली में होने वाली बैठकों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर कांग्रेस अपनी अगली राजनीतिक और कानूनी रणनीति तय करेगी।

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