Edited By Desh sharma, Updated: 29 Jan, 2026 07:12 PM

गुना जिला कोषालय में सरकारी स्टांपों के वितरण में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कोषालय के ही एक बाबू पर पद का दुरुपयोग करते हुए लगभग 2.70 करोड़ रुपये की गड़बड़ी करने का आरोप लगा है। इस मामले में कैंट थाना पुलिस ने आरोपी...
गुना (मिसबाह नूर): गुना जिला कोषालय में सरकारी स्टांपों के वितरण में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कोषालय के ही एक बाबू पर पद का दुरुपयोग करते हुए लगभग 2.70 करोड़ रुपये की गड़बड़ी करने का आरोप लगा है। इस मामले में कैंट थाना पुलिस ने आरोपी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब 17 और 18 दिसंबर को संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा ग्वालियर द्वारा जिला कोषालय का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच कुल 3.74 करोड़ रुपये के स्टांप भौतिक रूप से जारी किए गए, लेकिन कंप्यूटर प्रणाली में केवल 1.01 करोड़ रुपये की ही एंट्री की गई। शेष 2.70 करोड़ रुपये का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं मिला, जिससे सीधे तौर पर सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुँची है।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, जिला कोषालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 केशव वर्मा ने स्टांप वेंडरों को बिना किसी सक्षम अनुमति और बिना पावती के स्टांप प्रदान कर दिए। गंभीर बात यह है कि ट्रेजरी के सुरक्षित 'डबल लॉक' सिस्टम से स्टांप निकालकर बिना अनुमति 'सिंगल लॉक' में लाए गए और वेंडरों को दे दिए गए। बैंक रसीदें और अन्य जरूरी दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं रखे गए, जो कोषालय संहिता 2020 के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान आरोपी कर्मचारी केशव वर्मा ने लिखित आवेदन देकर यह स्वीकार किया है कि उन्होंने कोषालय अधिकारी के संज्ञान में लाए बिना और बिना कंप्यूटर प्रविष्टि के स्टांप जारी किए। उन्होंने इसे 'भूल' बताते हुए यह भी प्रमाणीकरण दिया कि यदि इन स्टांपों पर कोई वेंडर दावा करता है, तो वे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
जिला कोषालय अधिकारी राकेश कुमार के पत्र और वरिष्ठ कार्यालय के जांच प्रतिवेदन के आधार पर कैंट पुलिस ने बुधवार को आरोपी केशव वर्मा के खिलाफ बीएनएस और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। प्रथम दृष्टया यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला नजर आ रहा है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था। लिहाजा मामले की जांच जारी है।