MP में 3 नहीं 4 राज्यसभा सीटों पर चुनाव! तमिलनाडु रिजल्ट से बदलेगा पूरा खेल

Edited By Himansh sharma, Updated: 23 Apr, 2026 11:32 PM

mp rajya sabha polls may rise to 4 seats

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। अब तक प्रदेश में 3 राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय माना जा रहा था, लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे इस समीकरण को पूरी तरह बदल सकते हैं। यदि केंद्रीय राज्यमंत्री एल. मुरुगन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो मध्य प्रदेश में चौथी राज्यसभा सीट भी खाली हो सकती है, जिससे चुनावी गणित पूरी तरह बदल जाएगा।

दरअसल, मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन को भाजपा ने तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले की अविनाशी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। भाजपा यहां अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। अविनाशी सीट अन्नाद्रमुक का मजबूत गढ़ मानी जाती है, जहां पिछले पांच चुनावों में लगातार जीत दर्ज की गई है। ऐसे में मुरुगन की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।

नियमों के अनुसार यदि कोई सांसद विधानसभा चुनाव जीतता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी होती है। यानी यदि एल. मुरुगन विधायक बनते हैं, तो उन्हें राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ सकता है। ऐसे में मध्य प्रदेश की एक और राज्यसभा सीट खाली हो जाएगी और 6 महीने के भीतर वहां उपचुनाव कराना अनिवार्य होगा।

फिलहाल भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इन तीन सीटों पर मई-जून के बीच चुनाव होना तय है। लेकिन यदि मुरुगन इस्तीफा देते हैं, तो कुल 4 सीटों पर चुनाव होंगे।

वर्तमान विधानसभा गणित पर नजर डालें तो भाजपा के पास 163 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास अब प्रभावी रूप से सिर्फ 63 वोट ही बचे हैं। कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का मतदान अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने समाप्त कर दिया है, दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो चुकी है और निर्मला सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं।

तीन सीटों के चुनाव में एक राज्यसभा सदस्य चुनने के लिए लगभग 58 वोटों की जरूरत पड़ती है। इस हिसाब से भाजपा आसानी से 2 सीटें जीत सकती है, जबकि कांग्रेस तीसरी सीट के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन यदि चौथी सीट खाली होती है, तो प्रति सीट आवश्यक वोट घटकर लगभग 47 रह जाएंगे, जिससे पूरा राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

हालांकि कांग्रेस के लिए राह अब भी आसान नहीं है। संख्या बल कम होने के साथ-साथ क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बना हुआ है। वहीं भाजपा इस स्थिति का पूरा राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति पर काम कर रही है। अब सबकी नजर 4 मई को आने वाले तमिलनाडु चुनाव परिणामों पर टिकी है, क्योंकि वहीं से तय होगा कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव सिर्फ 3 सीटों पर होंगे या फिर चौथी सीट भी सत्ता के खेल को नया मोड़ देगी।

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