BJP समर्थित सरपंच को पंचायत CEO ने पद से हटाया, 6 साल तक चुनाव में भाग लेने पर भी प्रतिबंध,अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा एक्शन

Edited By Desh Raj, Updated: 04 May, 2026 06:42 PM

panchayat ceo removes bjp backed sarpanch from post

अपने पद और सत्ता के घमंड में प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर शासकीय जमीन पर अतिक्रमण करने वाले भाजपा समर्थित सरपंच को जिला पंचायत सीईओ ने पद से हटा दिया है। इसके साथ ही सरपंच पर दस हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।

जावरा (समीर खान): अपने पद और सत्ता के घमंड में प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर शासकीय जमीन पर अतिक्रमण करने वाले भाजपा समर्थित सरपंच को जिला पंचायत सीईओ ने पद से हटा दिया है। इसके साथ ही सरपंच पर दस हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई जिले में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

 

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सीईओं ने यह कार्रवाई जावरा जनपद पंचायत ग्राम पंचायत सादाखेड़ी के सरपंच ईश्वरलाल बागरी (चंद्रवंशी) के खिलाफ की है। अब भाजपा समर्थित सरपंच छ: साल तक कोई चुनाव नही लड़ सकेंगे। वही इस कार्रवाई से शासकीय जमीन पर अतिक्रमण करने वाले भूमाफियाओं और नेताओं में भी हडक़ंप मच गया है।  यह आदेश जिला पंचायत रतलाम की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वैशाली जैन द्वारा म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40 (1) (क) के अंतर्गत जारी किया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

सरपंच के खिलाफ हुई यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद हुई है। रतलाम निवासी बसंतीलाल ने लिखित शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि सरपंच द्वारा शासकीय भूमि के विभिन्न सर्वे नंबर (7, 174, 175, 176) में से लगभग 0.410 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। शिकायत में बताया गया कि उक्त भूमि चरागाह, रास्ता और अन्य सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में आती है। लेकिन सरपंच ने इस भूमि पर अतिक्रमण कर रखा हैं।

शिकायत के अनुसार सरपंच द्वारा शासकीय भूमि पर झोपड़ी का निर्माण किया गया। नलकूप कर कृषि कार्य किया जा रहा था। शिकायत प्राप्त होने के बाद जिला पंचायत कार्यालय द्वारा सरपंच एवं ग्राम पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिसके जवाब में सरपंच ने 13 मार्च 2026 को जवाब प्रस्तुत कर आरोपों से इनकार किया। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि उन्होंने किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया है और तहसील न्यायालय के आदेश की जानकारी भी उन्हें नहीं थी।

पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुई सीईओं ने तहसीलदार जावरा से प्रकरण की जानकारी मांगी गई। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तहसील न्यायालय द्वारा पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था, लेकिन सत्ता का घमंड और दबाव के कारण कोई जवाब नही दिया गया और इसलिए कोई  कार्रवाई नही हो पा रही थी। 

शिकायकर्ता द्वारा इस मामले में फिर से जानकारी मांगी गई थी जिसके बाद तहसीलदार न्यायालय जावरा द्वारा 19 मई 2025 को पारित आदेश में अतिक्रमण को प्रमाणित मानते हुए सरपंच पर 10 हजार का अर्थदंड लगाया गया और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे।

सीईओ वैशाली जैन ने साक्ष्यों और जवाबों का परीक्षण करने के बाद पाया कि सरपंच द्वारा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया। प्रकरण की जानकारी होने के बावजूद उचित जवाब नहीं दिया गया। इसी आधार पर धारा 40 के तहत सरपंच को पद से हटाने का निर्णय लिया गया। सीईओ द्वारा जारी आदेश में सरपंच को पद से तत्काल बर्खास्त करने के निर्देश दिए गए और पंचायत सदस्यता समाप्त कर दी गई। वहीं आगामी 6 वर्षों तक किसी भी पंचायत चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया हैं।

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