Edited By meena, Updated: 25 Apr, 2026 04:43 PM

छतरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। आरोप है कि गौरिहार विकासखंड की ग्राम पंचायत चंद्रपुरा में...
छतरपुर (राजेश चौरसिया) : छतरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। आरोप है कि गौरिहार विकासखंड की ग्राम पंचायत चंद्रपुरा में चुनावी रंजिश के चलते सरपंच पुत्र और सचिव ने मिलकर कई ग्रामीणों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इसके चलते पीड़ितों की पेंशन और राशन जैसी जरूरी योजनाएं अचानक बंद हो गईं।
गांव की बुजुर्ग गिरजा विश्वकर्मा, जो लंबे समय से पेंशन और राशन का लाभ ले रही थीं, एक दिन अचानक सुविधाओं से वंचित हो गईं। जब उन्होंने कारण जानने की कोशिश की, तो सामने आया कि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। गिरजा कहती हैं, “साहब हम जिंदा हैं, लेकिन कागजों में हमें मार दिया गया।” इसी तरह रामबाई रैकवार भी इस साजिश का शिकार बनीं। उन्हें भी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर योजनाओं से बाहर कर दिया गया।
वहीं पंचायत में कार्यरत कल्लू अहिरवार का मामला और भी गंभीर है। उन्हें मृत दर्शाकर उनकी वेतन तक रोक दी गई। कल्लू ने जिला पंचायत सीईओ को शिकायत देते हुए कहा, “मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मर चुका हूं, अब मुझे न्याय चाहिए।”

ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब चुनावी दुश्मनी के चलते जानबूझकर किया गया, ताकि उन्हें सरकारी लाभ से वंचित किया जा सके। मामले के सामने आने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जनपद सीईओ को दिए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना जांच के किसी को कागजों में मृत घोषित करना सिर्फ लापरवाही है या फिर यह एक सुनियोजित साजिश? फिलहाल पीड़ित न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि प्रशासन की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।