प्रतिमा बागरी ने मुझे मानहानि नोटिस देने की चेतावनी दी थी,1 साल हो गया इंतजार करते,नोटिस नहीं आया,रैगांव में फिर चुनाव होगा

Edited By Desh Raj, Updated: 24 Apr, 2026 05:51 PM

pratima bagri had warned me that she would serve me a defamation notice

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार की प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र को लेकर की गई याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने कड़ा रुख अपनाया है

भोपाल (इजहार खान): कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार की प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र को लेकर की गई याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने कड़ा रुख अपनाया है।जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की डबल बेंच ने साफ कहा कि पिछले लगभग 1 वर्ष से इस मामले की जांच लंबित क्यों रखी गई और इसे दबाकर क्यों रखा गया।

प्रतिमा बागरी ने मानहानि नोटिस देने की चेतावनी दी थी, 1 साल से नोटिस नहीं आया-अहिरवार

वहीं प्रदीप अहिरवार ने कहा है कि जब उन्होंनें प्रतिमा बागरी पर जाति प्रमाण पत्र को लेकर आरोप लगाए थे तो उन्होंने मुझे मानहानि नोटिस देने की चेतावनी दी थी, लेकिन 1 साल हो गया इंतजार करते-करते,  अभी तक कोई नोटिस नहीं आया है। जबकि मैने उनको अपना पता भी बताया है। अहिरवार ने कहा कि  नोटिस  इसलिए नहीं मिला क्योंकि वो राजपूत जाति से आती हैं। कई बार SDM पैसे लेकर फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं जिनका दुरुपयोग होता है। इससे आरक्षित वर्ग के लोगों को हानि पहुंचती है।

अब प्रतिमा बागरी मे जरा भी नैतिकता है, तो इस्तीफा दें, वैसे उनमें नैतिकता तो बची नहीं है क्योंकि उनकी भाई भी गांजा का व्यापार करते हैं। लेकिन जिस तरह से कोर्ट आदेश हुआ है उसके मुताबिक उनकी विधायकी जाएगी और फिर से चुनाव होगा।

प्रदीप अहिरवार का कहना है कि प्रतिमा बागरी ने, सामान्य वर्ग के राजपूत बागरी/ बागड़ी समाज से संबंध रखने के बावजूद अनुसूचित जाति वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है। राजपूत होने के बाद भी प्रतिमा ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया और मंत्री बन गई।

कोर्ट फैसले पर उत्साहित प्रदीप अहिरवार ने कहा है कि “मंत्री प्रतिमा बागरी अब महज दो महीने की मंत्री ही शेष बची हुई हैं। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद हमें पूरा विश्वास है कि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाएगा और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि “मुख्यमंत्री. मोहन यादव की सरकार अधिकारियों और अपने मंत्रियों को बचाने में लगी हुई है।

 

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