जाति प्रमाण पत्र को लेकर राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की बढ़ी मुश्किलें, हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

Edited By meena, Updated: 24 Apr, 2026 04:21 PM

state minister pratima bagri faces mounting trouble over caste certificate high

मध्यप्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग...

भोपाल (इजहार खान) : मध्यप्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की डबल बेंच, न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अविनेंद्र कुमार सिंह ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले लगभग 1 वर्ष से इस मामले की जांच लंबित क्यों रखी गई और इसे दबाकर क्यों रखा गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि उच्च स्तरीय छानबीन समिति इस मामले की 60 दिनों (दो माह) के भीतर जांच कर निर्णय प्रस्तुत करे। कोर्ट ने 20 जून तक का समय छानबीन समिति को दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से बरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश अग्रवाल ने इस मामले में पैरवी की।

गौरतलब है कि लगभग 1 साल पहले प्रदीप अहिरवार द्वारा राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर उच्च स्तरीय जांच समिति में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सामान्य वर्ग के राजपूत बागरी/ बागड़ी समाज से संबंध रखने के बावजूद अनुसूचित जाति वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है।

अहिरवार ने पिछले वर्ष, 1 अप्रेल 2025 को लंबे समय तक जांच नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए सरकार से जवाब-तलब किया और निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए।

इस पूरे मामले पर प्रदीप अहिरवार ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि “मंत्री प्रतिमा बागरी अब महज दो महीने की मंत्री ही शेष बची हुई हैं। उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद हमें पूरा विश्वास है कि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाएगा और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार अधिकारियों और अपने मंत्रियों को बचाने में लगी हुई है। प्रारंभिक रूप से यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध है, इसलिए छानबीन समिति लगातार दबाव में आकर जांच को धीमा रखे हुए थी।” अहिरवार ने आगे कहा कि शिकायत दर्ज होने के 1 साल बाद तक भी जांच पूरी नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें मजबूर होकर हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा। उनका आरोप है कि राज्य सरकार लगातार अपने मंत्रियों को संरक्षण देते हुए जांच प्रक्रिया को प्रभावित करती रही है।

अहिरवार ने कहा कि यह मामला सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से अनुसूचित जाति का लाभ प्राप्त करता है, तो यह वास्तविक पात्र लोगों के अधिकारों का सीधा हनन है। अहिरवार ने मांग की है कि इस मामले में उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशों के परिपालन में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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