Edited By meena, Updated: 16 Apr, 2026 01:18 PM

मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन असंतुष्ट नेताओं और पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को लेकर कड़े एक्शन की तैयारी में हैं। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मप्र काग्रेस कमेटी द्वारा उज्जैन संभाग के जिला अध्यक्षों के...
भोपाल : मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन असंतुष्ट नेताओं और पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को लेकर कड़े एक्शन की तैयारी में हैं। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मप्र काग्रेस कमेटी द्वारा उज्जैन संभाग के जिला अध्यक्षों के कार्यों की समीक्षा एवं विधानसभा प्रभारियों की महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। बैठक में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एवं प्रदेश सह प्रभारी संजय दत्त ने जिला अध्यक्षों द्वारा संचालित संगठनात्मक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान चुनाव के दौरान भीतरघात करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान के लिए विशेष रणनीति बनाई गई। इसके तहत विधानसभा प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय और निष्क्रिय दोनों तरह के नेताओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें।
विधानसभा प्रभारियों को दी गई अहम जिम्मेदारी
पटवारी ने कहा कि विधानसभा प्रभारी पार्टी की रीढ़ की हड्डी हैं और संगठन को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पार्टी द्वारा 230 प्रभारियों का चयन पूरी स्वबधानी और उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि कांग्रेस की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके। इसीलिए पार्टी हाईकमान ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विधानसभा प्रभारी अपनी रिपोर्ट में यह बताएं कि कौन नेता या कार्यकर्ता असंतुष्ट है और उसकी नाराजगी के पीछे क्या कारण हैं। इतना ही नहीं यह जानकारी भी निकालनी होगी कि वह किस नेता के प्रभाव में है और उसकी संगठन में क्या भूमिका है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य समय रहते असंतुष्ट और भीतरघाती तत्वों की पहचान करना है, ताकि चुनाव के दौरान पार्टी को नुकसान से बचाया जा सके।
सामाजिक समीकरण और प्रभावशाली लोगों पर भी नजर
कांग्रेस ने प्रभारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र में सामाजिक और जातीय समीकरणों का पूरा आकलन करें। इसके अलावा समर्पित कार्यकर्ताओं के संपर्क नंबर, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रभावशाली व्यक्तियों और सामाजिक संगठनों से भी लगातार संवाद बनाए रखने को कहा गया है। इससे जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
भीतरघात रोकने के लिए सख्त रणनीति
ज्यादातर अंसतुष्ट और नाराज नेता चुनाव के दौरान भीतरघात कर विपक्ष को फायदा पहुंचाते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए कांग्रेस अब पहले से ही सतर्क हो गई है और ऐसे लोगों की पहचान कर उनके प्रभाव को सीमित करने की योजना बना रही है। पार्टी का लक्ष्य है कि चुनाव में एकजुटता बनी रहे और किसी भी तरह की अंदरूनी कलह का असर न पड़े।
“जो काम करेगा वही पद पर रहेगा” का संदेश
जीतू पटवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पद केवल नाम के लिए नहीं होता, बल्कि जिम्मेदारी निभाने के लिए होता है। बिना कार्य के पद का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने पदाधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि अब संगठन में वही लोग टिक पाएंगे जो सक्रिय रूप से काम करेंगे। केवल पद लेकर चलने वाले नेताओं को अब ज्यादा महत्व नहीं दिया जाएगा। आने वाले समय में मेहनती और सक्रिय कार्यकर्ताओं को बड़ी जिम्मेदारियां दी जाएंगी, जिससे संगठन में नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता लाई जा सके।