बड़ा बवाल! साइकिल वितरण के दौरान हंगामा, पूर्व भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष जेल भेजे गए

Edited By Himansh sharma, Updated: 29 Jul, 2026 05:17 PM

ravi bhagat jailed over bicycle distribution protest

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड स्थित शासकीय हाई स्कूल कूपाकानी में सरस्वती साइकिल योजना के तहत आयोजित वितरण कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड स्थित शासकीय हाई स्कूल कूपाकानी में सरस्वती साइकिल योजना के तहत आयोजित वितरण कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और बाद में रवि भगत को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान बढ़ा विवाद

मंगलवार को स्कूल परिसर में छात्राओं को सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत साइकिलें वितरित की जानी थीं। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच रवि भगत भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई और कथित रूप से कहा कि मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली साइकिलों का वितरण नहीं होना चाहिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने वितरण प्रक्रिया रोकने और संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की। इससे कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

प्राचार्य ने प्रशासन को दी सूचना

स्कूल प्रबंधन ने रवि भगत को समझाने का प्रयास किया कि साइकिलों का वितरण शासन की स्वीकृत योजना के तहत किया जा रहा है। लेकिन विवाद शांत नहीं होने पर प्राचार्य ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस को सूचना दी।Collapse

पुलिस पहुंची, हिरासत के बाद कोर्ट में पेशी

सूचना मिलते ही लैलूंगा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और रवि भगत को हिरासत में लेकर थाने ले गई। थाना प्रभारी गिरधारी साव के अनुसार, शिकायत के आधार पर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और शांति भंग करने से संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।

मामले ने पकड़ा राजनीतिक रंग

घटना के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। एक ओर समर्थक इसे सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाने की कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करना कानून के दायरे में आता है। अब इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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