Edited By Vikas Tiwari, Updated: 11 Jan, 2026 06:19 PM

मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी एक बार फिर रेत माफियाओं के निशाने पर है। रायसेन जिले में नर्मदा की मुख्य धारा के बीचों-बीच अवैध रूप से रास्ते बनाकर खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है। स्थानीय किसानों और मछुआरों का आरोप है कि माफियाओं ने नदी के...
रायसेन (शिवलाल यादव): मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी एक बार फिर रेत माफियाओं के निशाने पर है। रायसेन जिले में नर्मदा की मुख्य धारा के बीचों-बीच अवैध रूप से रास्ते बनाकर खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है। स्थानीय किसानों और मछुआरों का आरोप है कि माफियाओं ने नदी के अंदर छोटे-छोटे मार्ग तैयार कर लिए हैं, जिससे जेसीबी मशीनों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और नावों के जरिए बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। इस अवैध गतिविधि से न केवल नर्मदा की धारा बदल रही है, बल्कि नदी का पारिस्थितिकी संतुलन भी गंभीर खतरे में पड़ गया है।

ग्रामीणों के मुताबिक रेत माफिया दिन ही नहीं, रात में भी बेखौफ होकर उत्खनन कर रहे हैं। गहरे जल क्षेत्रों से रेत निकालकर उसे घाटों पर स्टॉक किया जा रहा है और फिर ऊंचे दामों पर बाजार में खपाया जा रहा है। इससे किसानों की सिंचाई व्यवस्था, मछली पालन और नदी से जुड़े आजीविका संसाधनों पर सीधा असर पड़ रहा है।
जिले की कई तहसीलों में अवैध उत्खनन का जाल
रायसेन जिले की देवरी, उदयपुरा, बाड़ी और बरेली तहसील के ग्राम अलीगंज, मांगरोल, डूमर सिवनी, मोतलसिर, पतई घाट, बौरास घाट, केतोघान घाट, कैलकच्छ और हीरापुर जैसे क्षेत्रों में नर्मदा तट से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस केवल खानापूर्ति की कार्रवाई कर रही है, जबकि बड़े नेटवर्क पर कोई ठोस प्रहार नहीं हो पा रहा।
खनिज विभाग और पुलिस पर गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि रेत माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे हथियारों के बल पर दहशत फैलाकर अपना अवैध कारोबार चला रहे हैं। वहीं, पुलिस और खनिज अमले पर मिलीभगत के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सूचना प्रशासन तक पहुंचती है, तब तक माफिया मौके से फरार हो जाते हैं।
सीहोर में कार्रवाई, रायसेन में सवाल
हाल ही में पड़ोसी सीहोर जिले में अवैध रेत उत्खनन के मामले में खनिज विभाग द्वारा दो नावें जब्त की गई थीं, लेकिन रायसेन में ऐसी ठोस कार्रवाई अब तक नजर नहीं आई। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों का पक्ष
जिला खनिज अधिकारी महेंद्र पटेल का कहना है कि सूचना मिलने पर माइनिंग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम कार्रवाई करती है। हालांकि विभाग में स्टाफ की कमी के कारण हर जगह प्रभावी निगरानी संभव नहीं हो पा रही है। मामले में बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा है कि नर्मदा को ‘जीवित नदी’ मानकर संरक्षण के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। अब सवाल यह है कि क्या रायसेन जिला प्रशासन और खनिज विभाग समय रहते रेत माफियाओं पर लगाम लगा पाएंगे, या नर्मदा माँ को यूं ही छलनी होने दिया जाएगा?